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अग्निबाण नहीं, श्रीराम दबाएंगे रिमोर्ट और मारा जाएगा रावण

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नगर के राजकीय कालेज के मैदान में कारीगर द्वारा बनाये गये रावण, मेघनाथ,कुम्भकरण के पुतले। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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- इस बार आधुनिक तरीके से किया जाएगा लंकापति रावण का दहन
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- जीआईसी में तीन पुतलों में लगाए गए हैं 40 हजार रुपये के पटाखे
वासु प्रजापति
मुजफ्फरनगर। दशहरे पर इस बार रावण का दहन अलग अंदाज में होगा। पारंपरिक तरीके से श्रीराम अग्निबाण नहीं चलाएंगे, बल्कि रिमोट का बटन दबाकर पुतलों में आग लगाएंगे। पुतले का एक-एक हिस्सा धमाकों के साथ जलता चला जाएगा। तीनों पुतलों में करीब 40 हजार रुपये के पटाखे लगाए गए हैं।
अग्निवीर भर्ती के कारण इस बार दशहरे का मुख्य कार्यक्रम राजकीय कन्या इंटर कॉलेज के मैदान पर आयोजित होगा। यहां रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले बनाकर खड़े कर दिए गए हैं। दशहरे पर दहन को इस बार आधुनिक बनाते हुए रिमोट का प्रयोग किया जाएगा। तीनों पुतलों को तैयार करने में पूरा एक माह का समय लगा है। बांस, कपड़ा, कलर पेपर, मैदा, रस्सी, फूंस और पटाखों का इस्तेमाल किया गया है। संवाद
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इस तरह से होगा रावण का दहन
कारीगर रफीक ने बताया कि रिमोट का बटन दबते ही सबसे पहले रावण के पुतले का सिर उड़ जाएगा। इसके बाद पहले एक हाथ और फिर दूसरा हाथ जलेगा। दोनों हाथ जलने के बाद पुतले के दोनों पैर से आग पूरे शरीर से ऊपर तक जाएगी।
60 फीट का बनाया गया है रावण का पुतला
दशहरे के लिए तैयार किए गए रावण के पुतले की ऊंचाई 60 फीट, कुंभकरण और मेघनाद की ऊंचाई 50-50 फीट है। इन्हें बनाने में 1000 से 1200 रुपये फीट का खर्च आया है। तीनों पुतलों को बिल्कुल आधुनिक तरीके से बनाया गया है।
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मुस्लिम परिवार ने तैयार किए तीनों पुतले
करीब 60 वर्षों से तैयार करने वाले मुस्लिम परिवार ने ही इस बार भी यह तीनों पुतले तैयार किए है। नावल्टी चौक के रहने वाले रियाजुद्दीन के बेटे रफीक ने बताया कि वह लोग 1964 से दशहरे के लिए पुतले तैयार कर रहे है। उससे पहले उसके पिता पुतले तैयार करते थे, लेकिन अब वह ऋषिकेश में पुतले बनाते है।
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