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नवसंवत्सर सृष्टि सृजन का महापर्व : गुरुदत्त

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- आर्य समाज के 149 वें स्थापना दिवस पर यज्ञ एवं भजन का आयोजन
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संवाद न्यूज एजेंसी

मुजफ्फरनगर। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रम संवत 2080 के उपलक्ष्य में वेदमंत्रोच्चर से यज्ञ में आहुतियां अर्पित की गई। वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि वैदिक काल विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृति है। नवसंवत्सर सृष्टि सृजन का महापर्व है।

संतोष विहार स्थित वैदिक संस्कार केंद्र पर आर्य समाज के 149वें स्थापना दिवस पर यज्ञ में आहुतियां दी गई। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि वैदिक काल की गणना विश्व की सबसे व्यापक और सर्वप्रथम की गई काल गणना है। वेदों के ज्ञान और विज्ञान की प्रमाणिकता राष्ट्र का गौरव है। युग प्रवर्तक महर्षि दयानंद सरस्वती ने सनातन धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए नवसंवत्सर के दिन आर्य समाज की स्थापना की थी। रेणु शर्मा, अथर्व भारद्वाज, लक्ष्य देव, देवांश आदि ने ओम ध्वज फहराया।
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गांधी काॅलोनी आर्य समाज में यज्ञ और भजन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे। भजनोपदेशक सतीश और सुमन राही ने भजनों के द्वारा ऋषियों की महिमा सुनाई। संयोजक गजेंद्र सिंह राणा ने कहा कि वैदिक नववर्ष सृष्टि निर्माण का प्रतीक है। सनातन संस्कृति की परंपराओं से युवा पीढ़ी को जोड़ें। यज्ञ ब्रह्म इंद्र पाल सिंह आर्य तथा यज्ञमान डॉ. संदीप व रेणु, मनीष व रीना राणा तथा अनमोल छाबड़ा, पवन मित्तल रहे। गजेंद्र राणा,राकेश ढिंगरा, विजय पाल सिंह, जय सिंह धीमान, विकास पंवार, पवन मित्तल, जवाहर लाल अरोरा, जगदीश प्रसाद त्यागी, दिनेश ढिंगरा, इंद्र ढिंगरा, कांता देवी, ओमवती आदि मौजूद रहीं।
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