बुढ़ाना। खेड़ा मस्तान गांव के रहने वाले पूर्व उप थलसेना अध्यक्ष निरंजन सिंह मलिक का नोएडा में निधन हो गया। उन्होंने 38 वर्षों तक सेना में विभिन्न पदों पर रहकर देश की सेवा की। उन्होंने भाजपा के टिकट पर कैराना से चुनाव भी लड़ा था।
दिवंगत निरंजन सिंह मलिक के चचेरे भाई परमवीर मलिक ने बताया कि वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। नोएडा के कैलाश हॉस्पिटल में भर्ती थे। सोमवार को दोपहर एक बजकर पांच मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली। लेफ्टिनेंट जनरल निरंजन सिंह मलिक का अंतिम संस्कार मंगलवार दोपहर एक बजे दिल्ली कैंट में सेना के सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन होगा।
खेड़ा मस्तान से निकलकर ऊंचा किया देश का नाम
निरंजन सिंह मलिक गांव खेड़ा मस्तान के रहने वाले किसान सूबेदार धर्मपाल सिंह के बड़े बेटे थे। दूसरे नंबर पर उनके छोटे भाई नारायण सिंह भी सेना में ब्रिगेडियर के पद से सेवानिवृत्त हो चुके है। वह परिवार सहित नोएडा में रहते हैं। सबसे छोटे भाई सुरेंद्र मलिक अधिवक्ता रहे। उनका परिवार मुजफ्फरनगर में रहता है। निरंजन सिंह मलिक वर्ष 1998 में सेना के उप प्रमुख के रूप में सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने अपने कार्यकाल में परिचालन और रसद योजना, बजटीय प्रबंधन, सभी हथियारों और उपकरणों के अनुसंधान और विकास की जिम्मेदारी भी संभाली। . वे प्रशिक्षण और अन्य बलों के साथ संपर्क करने के लिए भी जिम्मेदार थे।
उन्हें रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के साथ काम करने के लिए प्रतिनियुक्त किया गया था। उन्होंने फ्रुंज मिलिट्री अकादमी व मास्को में चार साल का प्रशिक्षण लिया था। उन्होंने भारत के राष्ट्रपति के मानद एडीसी के रूप में भी कार्य किया। मलिक को बगदाद में इराकी सेना के अधिकारियों को उनके मशीनीकृत बलों के सलाहकार के रूप में प्रशिक्षित भी किया गया था। लेफ्टिनेंट जनरल मलिक ऑस्ट्रेलिया में पेसिफिक एरिया सीनियर ऑफिसर्स लॉजिस्टिक्स सेमिनार के लिए आपदा प्रबंधन पर प्रस्तुतकर्ता भी रहे। उन्हें विशिष्ट सेवा के लिए शांतिकाल का सर्वोच्च पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
भाजपा के टिकट पर लड़ा था चुनाव
लेफ्टिनेंट जनरल निरंजन सिंह मलिक को सेवानिवृत्त होने के बाद भाजपा ने उन्हें 1999 में कैराना से प्रत्याशी बनाया था। इस चुनाव में उनके सामने रालोद से अमीर आलम खां व सपा से मुनव्वर हसन चुनावी मैदान में थे। निरंजन सिंह मलिक दूसरे नंबर पर रहे थे।