निरंजन सिंह मलिक वर्ष 1998 में सेना के उप प्रमुख के रूप में सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होनें अपने कार्यकाल में परिचालन और रसद योजना, बजटीय प्रबंधन, सभी हथियारों और उपकरणों के अनुसंधान और विकास की जिम्मेदारी भी संभाली। वे प्रशिक्षण और अन्य बलों के साथ संपर्क करने के लिए भी जिम्मेदार थे। उन्हें रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के साथ काम करने के लिए प्रतिनियुक्त किया गया था। उन्होंने फ्रुंज मिलिट्री अकादमी व मास्को में चार साल का प्रशिक्षण लिया था।
उन्होंने भारत के राष्ट्रपति के मानद एडीसी के रूप में भी कार्य किया। मलिक को बगदाद में इराकी सेना के अधिकारियों को उनके मशीनीकृत बलों के सलाहकार के रूप में प्रशिक्षित भी किया गया था। लेफ्टिनेंट जनरल मलिक ऑस्ट्रेलिया में पैसिफिक एरिया सीनियर ऑफिसर्स लॉजिस्टिक्स सेमिनार के लिए आपदा प्रबंधन पर प्रस्तुतकर्ता भी रहे। उन्हें विशिष्ट सेवा के लिए शांतिकाल का सर्वोच्च पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
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भाजपा के टिकट पर लड़ा था चुनाव
लेफ्टिनेंट जनरल निरंजन सिंह मलिक को सेवानिवृत्त होने के बाद भाजपा ने उन्हें 1999 में कैराना से प्रत्याशी बनाया था। इस चुनाव में उनके सामने रालोद से अमीर आलम खां व सपा से मुनव्वर हसन चुनावी मैदान में थे। निरंजन सिंह मलिक दूसरे नंबर पर रहे थे।