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Muzaffarnagar News: मां ने देखा था दरोगा बनाने का सपना, संघर्ष से किसान मसीहा बन गए टिकैत

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चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के साथ उनके पोते गौरव टिकैत, फाइल फोटो
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चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की पुण्यतिथि पर विशेष
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- दिवंगत भाकियू अध्यक्ष चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने बुलंद की किसानों की आवाज


अमर उजाला ब्यूरो
सिसौली (मुजफ्फरनगर)। किसान मसीहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत किसानों के दिल में बसते हैं। किसानों के लिए उनका संघर्ष मिसाल है। जब टिकैत युवावस्था में थे तो मां मुखत्यारी देवी ने बेटे को पुलिस में दरोगा बनाने का सपना संजोया था, लेकिन टिकैत जिम्मेदारी में ऐसे उलझे कि पुलिस सेवा में नहीं गए। वक्त बदला तो वह भाकियू के अध्यक्ष बनें और दुनियाभर में किसानों के लिए उनका संघर्ष उदाहरण बन गया।

बाबा टिकैत की जीवन पर लिखी गई किताब चौधरी टिकैत में उनकी माता दिवंगत मुखत्यारी देवी ने अपने इस सपने का साझा किया था। पिता चौहल सिंह के निधन के बाद परिवार आर्थिक समस्याओं से जूझ रहा था। चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने कक्षा सात तक की शिक्षा हासिल की, लेकिन पारिवारिक समस्याओं में पढ़ाई छोड़नी पड़ी। बाल्यावस्था में ही बालियान खाप के चौधरी बनाए गए और इसके बाद उन्हें भाकियू की जिम्मेदारी मिली।
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भाकियू ने आकार लेना शुरू किया तो पुलिस के साथ आए दिन कहीं न कहीं सामना होने लगा। चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत ने किसानों के लिए पुलिस की लाठियां तक झेलीं। उन्होंने अपनी मां की याद में सिसौली में मुखत्यारी देवी टिकैत डिग्री कॉलेज की नींव रखवाई। वह खुद पुलिस में नहीं जा सके, लेकिन अपने बेटे चौधरी राकेश टिकैत को उन्होंने जरूर पुलिस में भेजा था। पिता के निधन के बाद टिकैत का बचपन अपने चाचा कंवल सिंह की देखरेख में बीता। चाचा के हुक्के की चिलम भरते-भरते एक दिन टिकैत भी हुक्का पीने लग गए थे।



मुंडभर में बसती थी चौधरी टिकैत की आत्मा
किसान मसीहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की आत्मा जीवनभर मुंडभर गांव में ही बसी रही। मुंडभर के किसानों ने भी हमेशा टिकैत की ढाल बनकर साथ दिया। टिकैत ने सार्वजनिक रूप से कई बार मुंडभर के सहयोग की सराहना की। मुंडभर मेंं बिजलीघर का निर्माण भी कराया।


अच्छा काम करने वाले बनते हैं छोटूराम और चरण सिंह

मुजफ्फरनगर। 15 मई, 2011। दिन रविवार, सुबह के 7 बजकर 5 मिनट का समय। बीमार हाल चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने आंखें खोली। सामने पौत्र गौरव टिकैत बैठे हुए थे। चौधरी टिकैत ने मुस्कुराते हुए दृष्टांत दिया कि अच्छा काम करने वाले सर छोटूराम, चौधरी चरण सिंह और भगत सिंह जैसे बन जाते हैं, लेकिन अगर कोई सही राह पर नहीं चलेगा तो समाज में नाम भी तोड़-मरोड़ दिए जाते हैं। टिकैत के यही आखिरी शब्द थे।


किताबों में चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत

भाकियू अध्यक्ष चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत के जीवन पर छह किताबें भी लिखी गई। वर्ष 1992 में लीबिया विश्वविद्यालय सभा के प्रोफेसर डॉ. महेन्द्र सिंह राठी ने चौधरी टिकैत के नाम से किताब लिखी। इसके बाद सिसौली के रामभरोसे ने संक्षिप्त जीवन परिचय जारी किया। अधिवक्ता अशोक बालियान ने वर्ष 2003 में किसान आंदोलन में चौधरी टिकैत की भूमिका लिखी। उनके जीवन पर कुल छह किताबें प्रकाशित हुई।


टिकैत ने सुनाया फैसला और शुरू हुआ मुकाबला

चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने जीवन का पहला महत्वपूर्ण फैसला केवल 16 साल की उम्र में किया था। वर्ष 1955 में जनता इंटर कॉलेज सिसौली में बागपत के टीकरी और सिसौली की टीमों के बीच स्कूली हॉकी प्रतियोगिता के एक मैच में विवाद हो गया था। विवाद बढ़ा तो खिलाडि़यों की उम्र के ही खाप चौधरी टिकैत को मौके पर बुलाया गया। महज 16 साल की उम्र में टिकैत ने खिलाडि़यों की पीठ थपथपाते हुए जब यह कहा कि खिलाड़ी कभी एक गोल की चिंता नहीं करता तो दोनों टीमें फिर मैदान में उतरी।


खाप पंचायतों के सारथी रहे टिकैत
भाकियू कोषाध्यक्ष दरियाव सिंह बताते हैं कि चौधरी टिकैत ने सामाजिक पंचायतों के आयोजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 1950, 1956 और 1963 की सर्वखाप पंचायतों में टिकैत की मौजूदगी रही। वर्ष 2006 और 2010 में टिकैत ने सौरम में ऐतिहासिक पंचायतों का आयोजन कर नया अध्याय भी लिखा।
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सिसौली में आज मनाई जाएगी महेंद्र सिंह टिकैत की पुण्यतिथि

सिसौली। भाकियू अध्यक्ष चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की पुण्यतिथि सोमवार को कस्बे के किसान भवन पर मनाई जाएगी। भाकियू नेता गौरव टिकैत ने बताया कि पुण्यतिथि पर सुबह आठ बजे किसान भवन पर यज्ञ होगा। इसके बाद वीर सैनिक सम्मान समारेाह और रक्तदान शिविर एवं मेडिकल जांच शिविर का आयोजन किया जाएगा।
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