इस सीट पर गुर्जर, जाट और पाल समेत अन्य बिरादरियों के नामों की भी छंटनी की जा रही है। सात अगस्त को शामली में सहारनपुर मंडल की समीक्षा बैठक के बाद पैनल को अंतिम रूप दिया जाएगा।
पहली बार उपचुनाव लड़ने जा रही बसपा की 11 अगस्त को लखनऊ में महत्वपूर्ण बैठक होगी। इससे पहले शामली में लोकसभा चुनाव में मिली हार की वजह जानने के लिए बैठक बुलाई गई है। सहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर लोकसभा के पदाधिकारी शामिल होंगे। उपचुनाव की वजह से बिजनौर लोकसभा की मीरापुर और पुरकाजी सुरक्षित सीट के पदाधिकारी भी बुलाए गए हैं।
बसपा से टिकट के दावेदार संगठन से संपर्क में हैं। जातीय समीकरण के दावे भी किए जा रहे हैं। 2027 से पहले महत्वपूर्ण चुनाव में बसपा हर कदम सोच-समझकर रख रही है। ऐसे में बेहतर प्रत्याशी के चयन को लेकर लखनऊ से दिशा निर्देश भी दिए गए हैं।
बसपा जिलाध्यक्ष सतीश रवि ने बताया कि मीरापुर सीट पर टिकट के दावेदार 40 से अधिक हैं। अंतिम पैनल बनाने का काम चल रहा है। पहले शामली में बैठक होगी, इसके बाद लखनऊ में राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री मायावती भी बैठक लेंगी।
पहले जाति तय होगी, फिर प्रत्याशी
पूर्व मंत्री सईदुज्जमां के बेटे सलमान सईद, पूर्व विधायक मौलाना जमील, शाह नजर, श्रीपाल पाल, पुष्पांकर पाल, विनय गुर्जर, जिला पंचायत सदस्य प्रमोद अन्ना, मनोज चौधरी के नाम टिकट के दावेदारों में प्रमुखता से शामिल किए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि चुनावी समीकरण को देखते हुए पहले जाति तय की जाएगी, फिर पैनल में से प्रत्याशी का चयन होगा। यही वजह है कि पैनल में हर बिरादरी के कम से कम दो-दो नाम शामिल किए जा रहे हैं।
मीरापुर सीट का इतिहास
परिसीमन के बाद 2012 में मीरापुर विधानसभा सीट बनाई गई थी। इससे पहले मोरना के नाम से सीट थी। जानसठ सुरक्षित सीट का कुछ हिस्सा मीरापुर में शामिल किया गया, जबकि अधिकतर हिस्सा खतौली विधानसभा में शामिल हुआ।
मीरापुर के पहले चुनाव के नतीजे
मौलाना जमील अहमद, बसपा- 56802
मिथलेश पाल, रालोद- 44069
डॉ. वीरपाल निर्वाल,भाजपा- 25689
मेहराजुद्दीन, सपा- 21083
इसलिए यहां हो रहा उपचुनाव
साल 2022 में मीरापुर सीट से चंदन चौहान पहली बार विधायक चुने गए थे। रालोद ने उन्हें बिजनौर लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया और वह जीतकर संसद पहुंच गए। चंदन चौहान के सांसद बन जाने के कारण मीरापुर सीट खाली हुई है।