जानसठ में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में प्रवचन करती राजयोगिनी।
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जानसठ। कस्बे में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के निकट चल रही श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान अमृत वर्षा कार्यक्रम में बताया गया कि मैडिटेशन के माध्यम से ही सृष्टि का कायाकल्प संभव है। मैडिटेशन व्यक्ति की बाह्य और आंतरिक शुद्धि करने के साथ मानसिक विकास भी करता है।
ब्रह्मकुमारी प्रवेश दीदी ने बताया कि राजयोग के द्वारा आत्मा और परमात्मा की अनुभूति भी कराई गई। इस दौरान उन्होंने पूजा करने की यथार्थ विधियां भी बताई। बताया कि एकाग्रता के द्वारा जब हम मन को तैयार कर प्रभु मिलन के लिए समर्पित होते हैं, तो हमें अपार आनंद की प्राप्ति होती है। वही जीवन का उद्देश्य है। ध्यान और एकाग्रता दूषित विचारों को मुक्त कर सकते हैं। इसके माध्यम से मन बहुत शक्तिशाली बन सकता है।
प्रवेश बहन ने कहा कि मन की शक्ति से अपने जीवन में परिवर्तन ला सकते हैं व प्रकृति को भी बदल सकते हैं। प्रकृति हमारी गुड फ्रेंड है। इस पांच तत्व की विधि के द्वारा ही आत्मा परमात्मा का अनुभव कर सकती है। अपने जीवन में परमात्मा शक्तियां भर सकते हैं। आत्मा अजर, अमर, अविनाशी है, चैतन्य है। इस अवसर पर विमलेश, राजकुमारी, सुदेशना, बबीता, कोमल, उर्मिला, कौशल्या, अनीता, समय कौर, रामरती, सरोज, सुनीता, रजनी गुप्ता आदि उपस्थित रहीं।