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Muzaffarnagar News: पालिका की सियासत से लखनऊ-दिल्ली में चमके कई सितारे

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जिले के कई नेताओं के लिए राजनीति की प्रथम पाठशाला रहे निकाय चुनाव
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संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। निकाय चुनाव की हलचल तेज हो गई है। संभावित उम्मीदवारों ने प्रचार में ताकत झोंकनी शुरू कर दी है। निकाय चुनाव जिले के कई नेताओं के लिए राजनीति की प्रथम पाठशाला रहे है। वर्तमान में प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री कपिलदेव अग्रवाल भी पालिका से ही प्रदेश की राजनीति में आए है। 1980 में प्रदेश सरकार में मंत्री रहे विद्याभूषण भी पालिका के चेयरमैन रहे थे।

पालिकाध्यक्ष रह चुके कपिल देव अग्रवाल
वर्तमान में कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल नगर पालिका में 16 नवंबर 2006 से 15 नवंबर 2011 तक चेयरमैन रहे। पालिका से शुरू की राजनीति के बाद वह वर्तमान में प्रदेश सरकार में मंत्री है। राज्य मंत्री चितरंजन स्वरूप की मृत्यु के बाद हुए उप चुनाव में 2016 में पहली बार विधानसभा पहुंचे। इसके बाद 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में जीते।
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कभी सभासद चुने गए थे कादिर राना
पूर्व सांसद कादिर राना नगर पालिका परिषद में 1988 में सभासद रहे। 1991 में शहर सीट से विधायक का चुनाव भी लड़ा, लेकिन हार गए। 1998 में सहारनपुर क्षेत्र से एमएलसी चुने गए। 2007 में मोरना से विधायक बने और 2009 के लोकसभा चुनाव में मुजफ्फरनगर सीट से बसपा के टिकट पर सांसद बने।

विद्याभूषण भी बैठे थे पालिका कुर्सी पर
स्वर्गीय विद्याभूषण 17 फरवरी 1973 में नगर पालिका के चेयरमैन चुने गए थे। इसके बाद 11 अगस्त 1977 तक वह पालिका के चेयरमैन रहे। पालिका से राजनीति शुरू करने वाले विद्याभूषण साल 1980 में मुजफ्फरनगर शहर सीट से विधायक रहे। वे प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे।


पालिका से ही चमके थे रणधीर सिंह
पूर्व विधायक स्वर्गीय रणधीर सिंह ने अपनी राजनीति की शुरूआत नगरपालिका में सभासद से की थी। साल 1988 के चुनाव में खादरवाला से सभासद चुने गए। इसके बाद वह भाजपा के टिकट पर दो बार विधायक रहे। वह पहली बार 1993 में और दूसरी बार 1996 में चरथावल से विधायक चुने गए थे। वह कभी कोई चुनाव नहीं हारे।
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केशव गुप्त विधायक भी रहे और चेयरमैन भी
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और जिले के प्रथम विधायक केशव गुप्ता भी चेयरमैन रहे हैं। केशव गुप्ता 1937 में पहली बार कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए थे। इसके बाद वह 14 नवंबर 1957 से 29 अप्रैल 1960 तक चेयरमैन रहे। इसके बाद वह 1962 में शहर से ही विधायक चुने गए।
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