- बाढ़ से सोलानी नदी के खादर क्षेत्र में जन जीवन अस्त-व्यस्त
- छतों पर दिन गुजार रहे लोग, पानी उतरने के लिए कर रहे प्रार्थना
अमर उजाला ब्यूरो
मोरना/पुरकाजी (मुजफ्फरनगर)। सोलानी नदी के खादर क्षेत्र में करीब 30 गांव के लोगों की जिंदगी प्रभावित है। मकानों की छतों पर डेरा जमाए लोग पानी उतरने का इंतजार कर रहे हैं। फसलें खराब हो गई है। हालात नहीं सुधरे तो बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ सकता है। एडीएम वित्त एवं राजस्व के साथ प्रशासन की टीम ने राहत सामग्री वितरित की।
बाढ़ से घिरे मजलिसपुर तोफिर, महाराजनगर, सिताबपुरी, खैरनगर समेत अन्य गांवों में शनिवार को ती हालात बद से बदतर रहे। घरों में कई-कई फीट पानी होने के कारण दिनचर्या अस्त-व्यस्त हो गई है। मकानों की छतों पर चूल्हे जलाने की मजबूरी है। बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण आटे का संकट गहरने लगा है। पानी से गुजरते हुए लोग किसी तरह भोकरहेड़ी पहुंचे और आटा पिसवाकर वापस अपने घरों की ओर लौटे। पशु पानी में ही बांधकर रखे गए हैं, चारे का संकट है। अगर आने वाले दिनों में पानी कम नहीं हुआ तो पूरे खादर क्षेत्र में बीमारियां बढऩे का खतरा है। सैकड़ों लोग भोकरहेड़ी के निकट सोलानी नदी के पुल पर अपने पशुओं के साथ ठिकाना बनाए हुए हैं।
प्रशासन ने वितरित की राहत सामग्री
एडीएम वित्त एवं राजस्व गजेंद्र कुमार, एसडीएम जानसठ अभिषेक कुमार ने राजस्व विभाग की टीम के साथ ट्रैक्टर पर सवार होकर खादर क्षेत्र का दौरा किया। यहां लोगों को राहत सामग्री भी वितरित की।
शिवालय डूबे, कांवडि़यों को कराई नदी पार
खादर क्षेत्र के शिवालय भी पानी में डूबे हैं। शिवरात्रि पर मंदिरों में पूजा भी नहीं हुई। ग्रामीणों ने भैंसा-बुग्गी पर ले जाकर कांवडि़यों को सोलानी नदी जरूर पार कराने का काम किया।
खतरे के निशान पर बह रही सोलानी
मोरना। केंद्रीय जल आयोग के जेई अमित गरियाल ने बताया कि सोलानी नदी का जलस्तर 227.10 मीटर पर है। नदी के पानी में मामूली गिरावट आई है। हालांकि जलस्तर खतरे के निशान पर ही है।