खुब्बापुर में नहीं काउंसिलिंग का माहौल
टीआईएसएस के विशेषज्ञों रथिस ऐश्वर्या, अर्पिता, अपर्णा जोशी और अब्दुल शाबान ने सोमवार सुबह सीएमओ कार्यालय पर जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. अर्पण जैन के साथ बात की। उन्होंने बताया कि वह सात नवंबर को खुब्बापुर के छात्र की काउंसिलिंग के लिए गए थे, लेकिन उन्हें देखकर छात्र छिप गया था। करीब तीन घंटे इंतजार के बाद भी छात्र सामने नहीं आया था। डॉ. अर्पण ने टीम को बताया कि गांव में काउंसिलिंग के लिए माहौल नहीं है। टीम ने कहा कि आगे इस तरह की घटना न हो, इसके लिए मेंटल हेल्थ की ओर से किस तरह का कार्य किया जा रहा है। मनोचिकित्सक ने बताया कि समय-समय पर विद्यालयों में जाकर अध्यापकों को प्रशिक्षण दिया जाता है।
प्रशासन ने वीडियो को वायरल होने से रोका
टीआईएसएस की चेयरपर्सन प्रोफेसर पद्मा एम. सारंगपाणि ने विकास भवन में हुई बैठक में डीएम अरविंद मल्लप्पा बंगारी से पूरे प्रकरण की जानकारी ली। घटना के बाद प्रशासन की ओर से क्या-क्या कार्रवाई की गई, इसकी जानकारी ली। डीएम ने बताया कि घटना होने पर उनकी तरफ से वायरल वीडियो को रुकवाया गया, ताकी बच्चे की पहचान छिपाई जा सके। इसके अलावा सबसे ज्यादा बच्चे को मानसिक या अन्य किसी तरह की कोई परेशानी न हो, इसपर ध्यान दिया गया।
यह था पूरा मामला
खुब्बापुर गांव के स्कूल में शिक्षिका तृप्ता त्यागी ने पांच का पहाड़ा नहीं सुनाने पर अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र की सहपाठियों से पिटाई करा दी थी। इसी दौरान जातीय टिप्पणी का भी आरोप है। प्रकरण के दौरान पीड़ित छात्र के चचेरे भाई ने वीडियो बना लिया। वीडियो के वायरल होते ही प्रतिक्रियाएं आने लगीं और शिक्षिका की गिरफ्तार करने की मांग उठने लगी।
आरोपी शिक्षिका पर अब एफआईआर दर्ज हो गई है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पोते तुषार गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसकी अगली सुनवाई 11 दिसंबर को होगी। उधर, पीड़ित छात्र का प्रवेश भी हो गया था और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर छात्र की काउंसिलिंग के लिए मुंबई की टीआईएसएस की टीम मुजफ्फरनगर पहुंची है।