- गांव के पब्लिक स्कूल में छात्र यूकेजी कक्षा में पढ़ता था
- रोजाना 50 किलोमीटर का सफर बनेगा परिजनों की समस्या
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। खुब्बापुर गांव के पीड़ित छात्र की उम्र को देखते हुए उसका प्रवेश कक्षा दो में किया गया है। हालांकि इससे पहले गांव के पब्लिक स्कूल में छात्र यूकेजी कक्षा में पढ़ता था। शारदेन स्कूल की ओर से उम्र को लेकर विचार करके छात्र का प्रवेश कक्षा दो में करने की बात कही गई थी।
वहीं, पीड़ित छात्र का प्रवेश तो हो गया, लेकिन उसकी शिक्षा पर अभी भी संकट है। अभी तक भी छात्र के स्कूल तक आने-जाने पर होने वाले परिवहन के खर्च को लेकर कुछ साफ नहीं हुआ है। परिवहन खर्च को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। स्कूल से गांव की एक तरफ की दूरी करीब 25 किलोमीटर है। जो प्रतिदिन 50 किलोमीटर होता है। यही नहीं सीधी कोई बस या परिवहन सेवा भी नहीं है। ऐसे में सवाल है कि आखिर बच्चा रोजाना शारदेन स्कूल तक कैसे पहुंचेगा। उसके परिवहन का इंतजाम कौन करेगा। उधर, बीएसए शुभम शुक्ला का कहना है कि इस मामले में विचार किया जा रहा है। फिलहाल परिजनों को ही आने-जाने का इंतजाम करना होगा।
यह था पूरा मामला
खुब्बापुर गांव के स्कूल में शिक्षिका तृप्ता त्यागी ने पांच का पहाड़ा नहीं सुनाने पर अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र की सहपाठियों से पिटाई करा दी थी। इसी दौरान जातीय टिप्पणी का भी आरोप है। प्रकरण के दौरान पीड़ित छात्र के चचेरे भाई ने वीडियो बना लिया। वीडियो के वायरल होते ही प्रतिक्रियाएं आने लगीं और शिक्षिका की गिरफ्तार करने की मांग उठने लगी। आरोपी शिक्षिका पर अब एफआईआर दर्ज हो गई है। महात्मा गांधी के पोते तुषार गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसकी सुनवाई 11 दिसंबर को होगी।