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Muzaffarnagar News: मुजफ्फरनगर - आका की तलाश, आतंकी मनसूबों की आशंका

Sat, 17 Feb 2024 12:27 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
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- बड़ा सवाल : जिले में तैयार तो नहीं हो रहे आतंकी स्लीपर सेल माड्यूल्स
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संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। बोतल बम बनाने वाले जावेद की गिरफ्तारी से सवाल उठ रहा है कि जिले में कोई आतंकी संगठन कहीं स्लीपर सेल माड्यूल्स तो तैयार नहीं कर रहा है। पूरे मामले के पीछे कौन है। महिला के तार किससे जुड़े हैं। जावेद को किसने बम बनाने पर लगाया है और पूरे गिरोह के इरादे क्या थे।
ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जब आतंकी संगठन चोरी छिपे नव युवकों को बहला फुसला कर अपने लिए काम करने के लिए तैयार करते हैं। युवकों को रुपये का लालच दिया जाता था और गिरफ्तार जावेद को भी बम बनाने के लिए रुपये दिए गए थे और कुछ रुपये बाद में दिए जाना तय किया गया था। इससे आशंका बन रही है कि आतंकी संगठन के लिए कोई स्लीपर सेल माड्यूल्स तो तैयार तो नहीं किए जा रहे हैं। एसटीएफ के साथ ही आईबी की टीम ने पहुंच कर जावेद से पूछताछ कर कई सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश की।
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रात से जावेद को तलाश रही थी पुलिस

सूत्र बताते हैं कि एसटीएफ को जावेद को बम लेकर जाने के बारे बृहस्पतिवार शाम को सूचना मिल गई थी। देर रात टीम शहर में पहुंच गई थी। जावेद को रात में आना था, लेकिन वह नहीं आया। टीम ने बराबर निगरानी बनाए रखी और शुक्रवार सुबह आखिरकार टीम ने जावेद को बमों के साथ गिरफ्तार कर लिया।



एक घर को उड़ाने के लिए काफी था एक बम

मुजफ्फरनगर। जावेद से चार टाइमर बोतल बम बरामद हुए हैं। बम को ग्लूकोज की बोतल में बनाया गया है। सेल व घड़ी भी लगाई गई है ताकी घड़ी में टाइम सेट कर बम को प्रयोग में लाया जा सके। सूत्र बताते हैं कि एक बम काफी पावरफुल था और एक बम एक बड़े घर को उड़ाने के लिए काफी था। उधर, जावेद को पकड़ने के बाद इमराना का नाम सामने आने पर एसटीएफ व खुफिया विभाग ने उसकी तलाश शुरू कर दी है।
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साल 2000 में बमोें के साथ पकड़ा था पाकिस्तानी वारिस

जिले में बम पहली बार नहीं बल्कि वर्ष 2000 में भी पकड़े गए थे। सूत्र बताते हैं कि पुलिस ने 31 मार्च 2000 को गांव जौला से अशफाक और पाकिस्तान के गुजरावाला निवासी वारिस को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उस समय दावा किया था कि वारिस आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद से जुड़ा है और इन दोनों के पास से अवैध असलहा व हैंड ग्रेनेड बरामद हुआ है। 18 मई 2017 को एडीजे-7 ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके अलावा जानसठ क्षेत्र के गांव महलकी निवासी तस्लीम का नाम भी बम बनाने के मामले में सामने आया था। तस्लीम आसाम में बम बनाते हुए घायल भी हुआ था। अब एसटीएफ ने जावेद को बमों के साथ पकड़ा है। खुफिया विभाग ने इस मामले में आतंकी संपर्क खोजने शुरू कर दिए हैं।
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