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क्षमा आत्मा की शुद्धि और वीरता से होती है उत्पन्न

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खतौली। पूर्यषण पर्व के उपरांत श्रद्धालुओं ने क्षमावाणी की और जिनेंद्र भगवान के सम्मुख पूजा अर्चना की।
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बृहस्पतिवार को प्रात:काल में केसरिया वस्त्र धारण करके इंद्र वेशभूषा में जिनेंद्र भगवान की शांति धारा एवं पूजन किया गया। क्षमावाणी महोत्सव के पावन पर्व पर सभी ने एक-दूसरे से क्षमायाचना की। ऑनलाइन धर्मचर्चा के माध्यम से डॉक्टर ज्योति जैन, विजय, रजनी, कल्पेंद्र ने बताया कि विश्व मैत्री का क्षमावाणी पर्व हमें सिखाता है कि हम दिल से क्षमा मांगे और दिल से क्षमा करें। क्षमा आत्मा की शुद्धि और वीरता से उत्पन्न होती है। अगर किसी भी व्यक्ति की किसी से कोई बात हो जाती है, तो बैर भाव की ग्रंथि नहीं बांधनी चाहिए। वार्तालाप बंद करना अनंतानुबंधी कषाय है। परस्पर मतभेद का कारण दूसरे व्यक्ति से अपेक्षा करना है। अपेक्षा की पूर्ति न होने पर हमारे मन में दूसरे के प्रति बैर न क्रोध आता है। हृदय से क्षमा करना जीवन में शांति लाता है। जैन समाज अध्यक्ष सुशील जैन ने भी कहा हमें आज वसुधैव कुटुंभकम की भावना को हृदय में लाना है। मौके पर सुनील, ज्योति, सुधीर, विपिन, प्रेम, संजय, धनेंद्र, अनिल, सतेंद्र, जिनेंद्र, चंद्रबोस, सतीश, मुकेश, रामकुमार, मुकेश, सुदेश, अजय, अशोक, योगेंद्र, ललिता, सीमा, मंजू आदि रहे।
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