मुजफ्फरनगर। सिंचाई विभाग की जानसठ में 337 बीघा जमीन पर पिछले 12 साल से चले आ रहे स्टे को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-13 के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह ने निरस्त कर दिया है। खाली पड़ी जमीन का अब सिंचाई विभाग विकास परियोजना में प्रयोग कर सकेगा।
जिला शासकीय अधिवक्ता (दीवानी) गौरव गोयल और सहायक शासकीय अधिवक्ता (दीवानी) रविदत्त ने बताया कि जानसठ के गड़वाड़ा, सिकंदरपुर और निरगाजनी में 2010 में सिंचाई विभाग ने 337 बीघा जमीन कब्जा मुक्त कराई थी। इसके बाद किसानों ने सिविल जज की अदालत में वाद दायर किया। चार दिसंबर 2010 को सिविल कोर्ट ने यथा स्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे। स्टे के बाद सिंचाई विभाग ने जिला एवं सत्र न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। प्रकरण की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-13 के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह ने करते हुए शुक्रवार को निचली अदालत की ओर से दिया गया स्टे निरस्त कर दिया है। अब सिंचाई विभाग जमीन का प्रयोग कर सकेगा।
बिजली परियोजना में प्रयोग की जा सकती है जमीन
लंबे समय से जिले में बिजली परियोजना के लिए सैकड़ों बीघा जमीन की तलाश था। ऐसे में एक साथ 337 बीघा जमीन मिलने से यह बड़ी परियोजना में प्रयोग की जा सकती है।
क्या था जमीन का मामला
डीजीसी (दीवानी) गौरव गोयल ने बताया कि सिंचाई विभाग ने जमीन को सूरत सिंह समेत अन्य किसानों को पट्टे पर दिया था। 1973 के बाद जमीन के पट्टों का नवीनीकरण नहीं कराया गया। भूमि की निर्धारित धनराशि 2004-05 तक जमा कराई जाती रही। इसके बाद 2010 में सिंचाई विभाग ने किसानों से जमीन पर कब्जा ले लिया था। किसानों ने सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां उन्हें स्टे मिल गया था। पिछले 12 साल से जमीन पर यथा स्थिति बनी हुई थी।