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Muzaffarnagar News: भूसे पर महंगाई की मार, भाव 800 के पार

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- गेहूं कटाई के बाद दो हजार रुपये बीघा मुश्किल में मिल रहा भूसा
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- सर्दी में गन्ने की पत्तियों में रोग आने से भूसे की बढ़ गई थी डिमांड

संवाद न्यूज एजेंसी
सिखेडा(मुजफ्फरनगर)। गन्ने के सीजन में ईख की पत्तियों में रोग आने से पशुपालकों को भूसा खिलाने को मजबूर होना पड़ा। भूसे की डिमांड बढ़ने के कारण गत वर्ष की तुलना में इस बार खेतों में भूसे के दामों में इजाफा हुआ है। खेतों से गेहूं उठाने के बाद किसान महंगाई को देखते हुए किसान भूसे का स्टॉक करना पसंद कर रहे है। इस बार सीजन में 800-850 रुपये क्विंटल मिल रहा है।
जिले में गोशालाओं के बढ़ने से पशुओं के आहार के रूप में भूसा का प्रयोग हो रहा हैं। पिछले सीजन में शुरू में भाव 500 रुपये था। लेकिन सर्दियों में 1000-1200 रुपये क्विंटल तक बिका था। प्रगतिशील किसान कुबेर दत्त एवं दिनेश कुमार ने बताया सर्दी में ईख की पत्तियों (गोलों) में रोग ने खतरा बढ़ाया। पशुपालकों ने भूसे का प्रयोग करना बेहतर समझा। डिमांड बढ़ी तो रेट बढ़ना स्वाभाविक था। मौजूदा सीजन में गेहूं की फसल की कटाई चल रही है, ऐसे में भूसे के दामों में कुछ कमी आई है। पिछले तजुर्बे से सबक लेकर पशुपालकों ने अभी स्टॉक करना शुरू कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेत के क्षेत्रफल के हिसाब से सौदा तय हो रहा है।
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खेतों में बेचना फायदे का सौदा
सिखेड़ा। किसान अब जोखिम से बचना चाहता है। पहले भूसा निकालने के बाद बेचा जाता था। कई दिनों तक खेतों में पड़े रहने से भूसे के खराब होना जोखिम माना जाता था। आंधी, बारिश में उड़ने के बाद भूसे की मात्रा में कमी आने से नुकसान का सौदा रहता था। किसान इससे बचने लगे है। फिलहाल अधिकांश लोग खेतों में प्रति बीघा की दर से भूसा बेचना मुफीद मानते है।
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