सपा-रालोद गठबंधन भी चुनाव में पूरी ताकत झोंकने के लिए तैयार है। मुख्य चुनाव में करीब 16 हजार वोटों के अंतर से गठबंधन के प्रत्याशी पूर्व सांसद राजपाल सैनी को हार का सामना करना पड़ा था। संभावना जताई जा रही है कि फिर से राजपाल सैनी को ही चुनाव के मैदान में उतारा जा सकता है। मुख्य चुनाव से पहले राजपाल सैनी बसपा छोड़कर सपा में शामिल हुए और चुनाव रालोद के निशान पर लड़ा था।
सबसे ज्यादा अंतर से जीते थे विक्रम सैनी
भाजपा के टिकट पर विक्रम सैनी सबसे अधिक मतों से चुनाव जीत चुके हैं। 2017 में सपा-कांग्रेस के उम्मीदवार चंदन चौहान को 31,374 वोटों से पराजित किया था। जबकि 2022 में पूर्व सांसद राजपाल सैनी को 16 हजार से अधिक मतों से हराया था। यही वजह है कि भाजपा में विक्रम सैनी का परिवार टिकट के सबसे बड़े दावेदारों में शामिल है।
खतौली सीट का इतिहास
1967 में खतौली विधानसभा से सीपीआई के सरदार सिंह विधायक चुने गए थे। इसके बाद बीकेडी के टिकट पर वीरेंद्र वर्मा, 1974 में लक्ष्मण सिंह, 1980 में कांग्रेस इंदिरा से धर्मवीर सिंह, 1985 में लोकदल से हरेंद्र सिंह, 1989 में जनता दल से धर्मवीर बालियान, 1991 व 1993 मेें भाजपा के टिकट पर सुधीर बालियान, बीकेडी के टिकट 1996 और रालोद के टिकट पर 2002 में राजपाल बालियान, 2007 में बसपा के योगराज सिंह, 2012 में रालोद के करतार भड़ाना और 2017 और 2022 में भाजपा के विक्रम सैनी विधायक चुने गए।
अब तक यह दावेदार भी आए सामने
भाजपा में टिकट के दावेदारों में पूर्व जिलाध्यक्ष सुधीर सैनी और रुपेंद्र सैनी भी शामिल हैं। उधर, रालोद-सपा गठबंधन से पूर्व सांसद राजपाल सैनी के अलावा रालोद नेता अभिषेक चौधरी और पूर्व युवा जिलाध्यक्ष संजय राठी भी शामिल हैं।