मुद्दा- कूड़ा निस्तारण
- शहर से लेकर देहात तक में भी कूड़ा बन रहा परेशानी
अमर उजाला टीम
मुजफ्फरनगर। पालिका और नगर पंचायतों में कूड़ा निस्तारण बड़ी समस्या बन रहा है। शहर और खतौली पालिका में कूड़ा निस्तारण के ठोस इंतजाम नहीं किए जा सके हैं। चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ऐसे में मतदाताओं का कहना है कि सभासद और अध्यक्ष पद के प्रत्याशी आएंगे तो हम कूड़ा निस्तारण की योजना के विषय में उनसे पूछेंगे।
शहर के चारों तरफ कूड़े के ढेर देखे जा सकते हैं। रामलीला टिल्ला की समस्या को लेकर कई बार नागरिक नाराजगी जता चुके हैं। पिछले दिनों ही प्रदेश सरकार ने 11.54 करोड़ रुपये कूड़ा निस्तारण के लिए स्वीकृत किए, जिनमें से नगरपालिका को 2.70 करोड़ रुपये जारी भी हो गए थे। नागरिक डॉ. राकेश शर्मा कहते हैं कि शहर में जगह-जगह कूड़ा बिखरा देखा जा सकता है। नागरिकों को बेहतर सुविधा मिलनी चाहिए। चुनाव आ गए तो सभी नागरिक अपने-अपने क्षेत्र के मुद्दे जनप्रतिनिधियों के सामने उठाने का काम करें।
तीन लाख खर्च फिर भी बिखरा है कूड़ा
शाहपुर। नगर पंचायत के लिपिक नईम अहमद ने बताया कि कस्बे में आठ मीट्रिक टन कूड़ा उठाया जाता है। हर महीने तीन लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। कस्बा निवासी मनोज सिंघल का कहना है कि सफाई व्यवस्था बेहतर नहीं है । नगर पंचायत के सफाई कर्मी मनमाने तरीके से कार्य करते हैं ।
गंगनहर पटरी को बना दिया कूड़ा स्थल
खतौली। नगर पालिका एसआई नेपाल सिंह चौधरी ने बताया कि नगर में प्रतिदिन 25 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है, जिसे गंगनहर पटरी पर डाला जा रहा है। कूड़ा निस्तारण प्लांट बनकर तैयार हो चुका है। जल्द ही कूड़े को प्लांट पर पहुंचा जाएगा। कूड़ा उठाने के लिए 18 वाहन है, जिसमें 12 मिनी टीपर, दो ट्रैक्टर और एक डंफर शामिल है।
बुढ़ाना में ये है इंतजाम
बुढ़ाना। प्रतिदिन करीब 10 टन कूड़ा उठान होता है। 84 कर्मचारी सफाई कार्य में लगे हैं। कूड़ा उठाने में वाहन व अन्य मशीनरी का भी प्रयोग होता है। इसके लिए डंपिंग ग्राउंड बना हुआ है।
मीरापुर में भी कूड़ा बना समस्या
मीरापुर। नगर पंचायत ईओ कमलाकांत राजवंशी का कहना है कि प्रतिदिन आठ मैट्रिक टन कूड़ा उठाया जा रहा है। कूड़ा डंपिंग ग्राउंड में डाला जाता है। कस्बा निवासी युवा समाजसेवी सोभित कुमार का कहना है कि कस्बे में सफाई व्यवस्था सही नहीं है। जगह जगह कूड़े के ढेर लगे रहते है।
पुरकाजी में खर्च हो रहे डेढ़ लाख
पुरकाजी। नगर से रोजाना आठ मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। करीब डेढ़ लाख रुपये प्रति माह आता है। नागरिकों का कहना है कि और बेहतर तरीके से सफाई की व्यवस्था की जानी चाहिए।
जानसठ में इस तरह निस्तारण
जानसठ। नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी विनोद कुमार शुक्ला ने बताया कि प्रतिदिन 50 प्रतिशत कूड़ा एमआरएफ सेंटर में निस्तारण करा दिया जाता है। सेंटर में छह कर्मचारी लगे हुए हैं, जो कूड़ा निस्तारण करते हैं। कूड़ा निस्तारण करने के लिए प्रति महीना ढाई लाख रुपये का खर्च होता है।
चरथावल से निकल रहा 5.50 टन कूड़ा
चरथावल। नगर पंचायत में तीन ट्रैक्टर ट्रॉली, चार टिपर, एक जेसीबी मशीन है। कस्बे की बाहरी सीमा में एक एमआरएफ प्लांट लगा है। करीब 70 कर्मचारियों द्वारा कस्बे का करीब 5.50 टन कूड़ा रोजाना उठता है। मोहल्ला महाब्रह्मनान निवासी यशपाल सिंह पाल बताते है कि सफाई व्यवस्था उचित है। सड़कों पर आवारा कुत्ते गंदगी करते है। नगर पंचायत प्रशासन को इस पर अंकुश लगाना चाहिए।
बाहरी क्षेत्रों में फैल रहा कूड़ा
सिसौली। कस्बे में रोजाना गलियों से कूड़ा उठान हो रहा है। मगर, बाहरी इलाके में डाला जा रहा कूड़ा लोगों के लिए समस्या बन रहा है।
एक लाख खर्च फिर भी सफाई नहीं
भोकरहेड़ी। कूड़ा निस्तारण पर करीब एक लाख रुपये प्रति माह खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन फिर भी सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं है। किसान संजीव कुमार ने बताया कि सफाई व्यवस्था नहीं के बराबर है। खासकर त्योहारों पर सफाई की उचित व्यवस्था नहीं होती। गलियों में गंदगी के ढेर जगह जगह दिखाई देते हैं। कस्बे में सफाई व्यवस्था चरमराई रहती है।