मुजफ्फरनगर। खेत की खतौनी और घर की घरौनी आम आदमी के पास संपत्ति का दस्तावेज बनी है। जिले में एक लाख 57 हजार 915 परिवारों की घरौनी बनी है। 90 प्रतिशत परिवारों को घरौनी का वितरण हो गया है। छह गांव ऐसे रह गए हैं, जिनकी घरौनी नहीं बन पाई है।
सर्वे ऑफ इंडिया की टीम ने ड्रोन कैमरों की मदद से जिले के सभी 457 गांवों का सर्वे किया। दो साल पहले शुरू हुइ प्रक्रिया में 31 मार्च तक सभी परिवारों को घरौनी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया था। इसके लिए जिला प्रशासन ने अभियान भी चलाया था। जनपद में कुल एक लाख 57 हजार 915 परिवारों की घरौनी बनकर तैयार हुई। हालांकि जिले के छह गांव ऐसे हैं, जिनकी घरौनी नहीं बन पाई है। सर्वे ऑफ इंडिया की टीम इन गांवों का दोबारा सर्वे करेगी।
एसडीएम सदर परमानंद झा ने बताया कि सदर तहसील के चार गांव कुटबा, मलीरा, रेई, शाहबुद्दीनपुर है। एक गांव जानसठ और एक बुढ़ाना तहसील का है। इन गांवों में टीम दोबारा सर्वे करेगी इसके बाद घरौनी जारी होगी। एडीएम प्रशसन नरेंद्र बहादुर सिंह का कहना है कि घरौनी का वितरण लेखपालों के माध्यम से हो रहा है। 90 प्रतिशत वितरण हो चुका है। उन्होंने बताया कि वह घरौनी वितरण की लगातार समीक्षा कर रहे हैं। गांवों में प्रत्येक परिवार को उसकी घरौनी मिल जाए यह हमारा प्रयास है। जिले के समस्त लेखपालों को इस संबंध में निर्देश जारी किए गए है।
ड्रोन के माध्यम से लिया जाता है गांव का चित्र
घरौनी तैयार करने में सर्वे ऑफ इंडिया की टीम का महत्वपूर्ण योगदान है। ड्रोन कैमरे के माध्यम से पूरे गांव का नक्शा तैयार किया जाता है। प्रत्येक घर का विवरण लेखपाल, पंचायत सचिव के माध्यम से एकत्र किया जाता है। इसके बाद कम्प्यूटर से तैयार घरौनी का वितरण होता है।