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गुरुकुल संचालित होंगे, तभी बचेगी सनातन संस्कृति: गुरूदत्त

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वैदिक साधना आश्रम में मनाया गया महर्षि दयानंद का निर्वाण दिवस
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संवाद न्यूज एजेंसी
चरथावल। वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि भारत में आजादी के बाद गुरुकुल शिक्षा पद्धति को सुनियोजित षड्यंत्र के तहत खत्म किया गया है। गुरुकुल बचेंगे, तभी सनातन संस्कृति बचेगी।
रोहना रोड स्थित वैदिक साधना संस्कृत विधा आश्रम गुरुकुल में आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती के निर्वाण दिवस पर आयोजित किया गया। स्मृति यज्ञ में पधारे आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा ऋषि दयानंद ने वैदिक संस्कृति की रक्षा के लिए जीवन की आहुति दी। वेदों की ओर लौटों का आह्वान कर समाज में कुरीतियों, पाखंड और अंधविश्वास को मिटाने के अतुल्य कार्य किए। उनकी स्वराज्य की उद्घोषणा ने युवाओं की क्रांति से जोड़ा था। पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, लाला लाजपत राय, भगत सिंह, स्वामी श्रद्धानंद आदि देशभक्त ऋषि की प्रेरक गर्जना से आजादी आंदोलन में मातृभूमि के लिए शहीद हुए। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद गुरुकुलों को प्रोत्साहित नहीं किया गया। मदरसों की अपेक्षा आज जिले में नाममात्र के गुरुकुल बचे है। प्रत्येक तहसील क्षेत्र में एक गुरुकुल संचालित होगा, तभी सनातन संस्कृति बचेगी। गुरुकुलों को दान का सहयोग कीजिए।
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आचार्य दयादेव ने कहा कि महर्षि दयानंद ने अपने गुरु स्वामी विरजानंद को दिया वचन पूरा कर भारत का नव निर्माण किया। ऋषि ने ज्ञान का प्रकाश फैलाकर अविद्या का नाश किया। डॉ. नीरज शास्त्री ने कहा कि युवा उनके महान व्यक्तित्व को पढ़े, ताकि जीवन संस्कारित बन सके। आचार्य दयादेव को शॉल और महर्षि दयानंद का चित्र भेंट किया। वेदपाठ आचार्य सुरेंद्र और यशदेव आर्य ने किया। ब्रह्मचारी देशवीर आर्य, संदीप आर्य, अनुज आर्य, प्रशांत आर्य मौजूद रहे।
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