साहसी और महान योद्धा थे श्री गुरू गोबिंद सिंह: वशिष्ठ
देवबंद। श्री गुरू गोबिंद सिंह जी के प्रकाशोत्सव के दौरान घरों में प्रभातफेरी सेवा करने वाली संगतों को गुरुद्वारा कमेटी की ओर से सिरोपा देकर सम्मानित किया गया। गुरुद्वारा श्री गुरुनानक सभा में बृहस्पतिवार की रात हुए कार्यक्रम में गुरवाणी का गायन करते हुए पंडित पीआरएस वशिष्ठ ने कहा कि सच्चें पातशाह गुरू गोबिंद सिंह जी साहसी, पराकर्मी और महान योद्धा थे। उन्होंने धर्म की रक्षा करते हुए अपना सारा परिवार न्यौछावर कर दिया। इसलिए उन्हें सर्ववंश दानी भी कहा जाता है। गुरू गोबिंद सिंह जी ने अपने जीवन काल में मुगलों व पहाड़ी राजाओं के साथ 14 जंग लड़ी और सभी में फतेह हासिल की। सन् 1699 में उन्होंने आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना कर मुगलों के जबर व जुल्म से बेहाल मानव जाति में नई जान फूंकी थी। कार्यक्रम में प्रभातफेरियों की सेवा करने वाले परविंदर सिंह कक्कड़, शोभा सिंह मनचंदा, चन्नी बेदी, सिमरलाल सचदेवा और अंशुल गाबा को सिरोपा देकर सम्मानित किया गया। साथ ही भाजपा के नवनियुक्त नगराध्यक्ष विपिन गर्ग को भी गुरुद्वारा कमेटी की ओर से सिरोपा प्रदान किया गया। ज्ञानी नितिन सिंह, अमरदीप सिंह, जगप्रीत सिंह, बलदीप सिंह, जोगेंद्र सिंह बेदी आदि ने गुरवाणी का गायन किया। संचालन गुरजोत सिंह सेठी ने किया। इस मौके पर सरदार इंद्रपाल सिंह सेठी, सचिन छाबड़ा, दिलबाग सिंह उप्पल, गुरविंदर सिह छाबड़ा, अजय मदान, आशीष सिंह,जसवंत सिंह, अभिषेक त्यागी, अमित गर्ग, मनीष भारती, अमित भारती, प्रांशुल गुगलानी, राजपाल सिंह आदि मौजूद रहे।