सरकारी गेहूं क्रय केंद्र खुल चुके हैं। बृहस्पतिवार से 19 क्विंटल गेहूं की खरीद के साथ विभाग ने खरीद भी शुरू कर दी है। बाजार में अधिक दाम होने के कारण सरकारी क्रय केंद्रों पर टारगेट पूरा करना यहां किसी चुनौती से कम नहीं है। विभाग ने जिले में 54 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा है और इसके लिए 38 क्रय केंद्र बनाए गए हैं।
प्रदेश सरकार ने गेहूं खरीद के लिए 1625 रुपये क्विंटल दाम निर्धारित किया है। जिले में खरीद के लिए 38 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं। एक अप्रैल क्रय केंद्र खुल चुके हैं, लेकिन पहली खरीद बृहस्पतिवार को हुई। नवीन मंडी स्थल पर खाद्य विभाग के क्रय केंद्र पर एक किसान ने 19 क्विंटल गेहूं दिए। जिले में गेहूं की कटाई भी शुरू नहीं हुई है। दस अप्रैल के बाद क्रय केंद्रों पर गेहूं अधिक मात्रा में आना शुरू होने की संभावना है। विभाग ने 54 हजार मिट्रिक टन का खरीद का लक्ष्य रखा है।
इस बार टारगेट को पूरा करना विभाग के लिए एक चुनौती होगा। इसका कारण है बाजार में गेहूं का दाम अधिक होना। जिले में प्रत्येक वर्ष व्यापारी सरकारी रेट से अधिक दाम पर ही खरीदते हैं। अभी तक जो खरीद शुरू हो रही है, उनमें व्यापारी 1700 रुपये क्विंटल से लेकर 1800 रुपये क्विंटल तक खरीद रहे हैं।
ऐसे हालात में किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं क्यों देगा। वहीं, किसान विजयपाल का यह भी कहना है कि व्यापारी गेहूं की क्वालिटी देखकर खरीदता है। क्रय केंद्रों पर छानबीन नहीं होती। कुछ किसान क्रय केंद्र पर गेहूं देना ही ठीक मानते हैं और कुछ बाजार के दाम देखते हैं। अब देखना यह है कि इस सीजन में विभाग टारगेट को छू पाता है या नहीं। डिप्टी आरएमओ प्रिंस चौधरी का कहना है कि हमें पूरी उम्मीद हैं कि लक्ष्य पूरा होगा। बाजार के दामों का असर अवश्य पड़ेगा।