10 अक्तूबर 2005 को कर दी गई थी शामली के गांव तितरवाड़ा निवासी पदम की हत्या
पीठासीन अधिकारी अशोक कुमार की अदालत में मामले का परीक्षण हुआ
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। शामली जिले के कैराना थाना क्षेत्र में पदम की हत्याकांड में साढ़े 17 साल बाद फैसला सुनाया गया। अदालत ने चार कातिलों को आजीवन कारावास की सजा और जुर्माने से दंडित किया है। अपर सत्र न्यायालय कोर्ट नंबर पांच (विशेष न्यायालय गैंगस्टर कोर्ट) के पीठासीन अधिकारी अशोक कुमार की अदालत में मामले का परीक्षण हुआ।
जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राजीव शर्मा और सहायक शासकीय अधिवक्ता अमित त्यागी ने बताया शामली जिले के कैराना थाना क्षेत्र के गांव तितरवाड़ा की घटना है। करीब साढे 17 साल पहले हमलावरों ने रंजिश में पदम की गोलियां बरसाकर हत्या कर दी थी। आरोप था कि पदम की पत्नी से अभियुक्त सतेंद्र से अवैध संबंध हो गए थे, जिसका वह विरोध करता था। मगर, पत्नी नहीं मानी और अपने मायके सहारनपुर के गंगोह क्षेत्र में जाकर रहने लगी थी। इसी बात को लेकर दोषी सतेंद्र और पदम में रंजिश रहने लगी थी।
10 अक्तूबर 2005 की रात को पदम साथियों के साथ गांव में रामलीला देखकर घर लौट रहा था। इसी समय हमलावरों ने घेर कर उस पर फायरिंग कर दी। उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। मृतक के भाई ने सतेंद्र उर्फ सुरेंद्र, सुंदर, संजय और शक्ति उर्फ कल्लू के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कराया था। पुलिस ने विवेचना के बाद दोषियों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।
सत्र परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष ने मजबूत पैरवी की। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद अदालत ने चारों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा और 20-20 हजार रूपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। इनमें से तीन दोषियों को संजय, सतेंद्र और शक्ति को आयुध अधिनियम की धारा में भी दो वर्ष का कारावास और पांच पांच हजार रूपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।