गन्ने के साथ सहफसली खेती करें किसान: वीरेश
मुजफ्फरनगर। गन्ना शोध केंद्र के संयुक्त निदेशक डॉ वीरेश कुमार ने कहा कि किसान गन्ने के साथ सहफसली खेती करें। इसी से किसानों की आय दोगुनी होगी।
गन्ना शोध संस्थान में केंद्र सरकार के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा द्वारा आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण में डॉ वीरेश कुमार ने कहा कि गन्ने के साथ हम प्राचीन समय से सहफसली खेती करते आए हैं। सहफसली खेती को हमें फिर से शुरू करना है। इससे गन्ने की फसल को भी लाभ होगा। प्याज, लहसुन, मटर की खेती को किसान आसानी से कर सकते हैं। सहायक निदेशक डॉ रामबरण सिंह ने किसानों को तकनीकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किन विधियों से गन्ने की अधिक पैदावार होगी। वैज्ञानिक ओएस जोशिया ने गन्ने की जातियों के संतुलन की बात कही। उन्होंने कहा कि एक ही प्रजाति का गन्ना बोने से किसान कभी भी संकट में आ सकता है। वैज्ञानिक डॉ जेपी सिंह ने शस्य क्रियाएं, अंत: फसलें और ट्रेंच विधि के बारे में बताया। डॉ अर्चना ने गन्ने में संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन के बारे में बताया। डॉ सीएस पोरनवाल ने बीज प्रबंधन का तरीका बताया। नीलम कुरील ने गन्ने में लगने वाले कीटों के बचाव के बारे में जानकारी दी। डॉ वेद प्रकाश ने मृदा की जांच और उसके प्रबंधन के बारे में बताया। जिला गन्ना अधिकारी डॉ आरडी द्विवेदी ने प्रशिक्षण शिविर में कहा कि जो किसान गन्ने के साथ दूसरी खेती कर रहे हैं, वह अधिक लाभ कमा रहे हैं। उन्होंने तितावी के किसानों का उदाहरण भी दिया, जो पपीते और केले की खेती गन्ने के साथ कर रहे हैं। प्रशिक्षण के बाद किसानों को प्रमाणपत्र भी दिए गए। किसान बलविंदर सिंह, अनुज सिंह, नरेंद्र सिंह, रविंद्र सिंह, पवन कुमार आदि को सम्मानित किया गया। आयोजन में सुंदरपाल राठी एवं अनुज मलिक का सहयोग रहा।