- बारिश कम होने की वजह से धान की रोपाई हो रही प्रभावित
- 10800 हेक्टेयर क्षेत्रफल था पिछले साल जिले में धान का
- 11500 हेक्टेयर का लक्ष्य तय कर दिया इस बार शासन ने
- 07 हजार हेक्टेयर जमीन पर ही धान की रोपाई हुई अब तक
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। मानसून की बारिश नहीं होने के कारण इस बार जिले में धान रोपाई का लक्ष्य भी पूरा होने की संभावना नहीं दिख रही। मौसम का मिजाज देखते हुए किसान धान से परहेज कर रहे हैं। आंकड़ाें की माने तो जिले में पिछले साल किसानों ने 10 हजार 800 हेक्टेयर जमीन पर धान की रोपाई की थी। इस बार शासन ने लक्ष्य 11500 हेक्टेयर का तय कर दिया, लेकिन मौसम के बदले रुख से किसान परेशान हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि अभी तक सिर्फ सात हजार हेक्टेयर जमीन पर ही धान की रोपाई हुई है। किसान मौसम का रुख भांपकर धान की रोपाई करते हैं। बारिश नहीं होने के कारण किसानों ने धान की रोपाई नहीं की, बल्कि खाली हुई जमीन पर दोबारा से चारे की फसल बोनी शुरू कर दी है। रामराज खादर क्षेत्र में इस बार किसानों ने धान के बजाए गन्ने को प्राथमिकता दी है।
गन्ने का बढ़ा क्षेत्रफल भी बना वजह
इस बार जिले में गन्ने का क्षेत्रफल 2600 हेक्टेयर बढ़ गया है। पिछले साल धान की रोपाई करने वाले किसानों ने गन्ने को प्राथमिकता दी है। इसी वजह से इस बार धान रोपाई का लक्ष्य पूरा होने की संभावना कम है।
पौध सूखने का बन रहा खतरा
मौसम में अधिक गर्मी होने के कारण इस बार पौध सूखने का भी खतरा है। जिले में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के पार चल रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र बघरा के प्रभारी डॉ. अनिल कटियार बताते हैं कि अधिक गर्मी में पौध सूखने का खतरा है। ऐसे में किसानों को चाहिए कि शाम के समय धान की रोपाई करें और खेत की तुरंत सिंचाई कर दें।
प्रशासन कराएगा धान का सर्वे : संजय सिंह
जानसठ तहसीलदार संजय सिंह का कहना है कि रोपाई चल रही है। 15 अगस्त के बाद तहसील क्षेत्र में सर्वे कराया जाएगा।
किसान बोले, मौसम का भरोसा नहीं, बढ़ रही लागत
आलमपुर गांव के किसान सुरजीत सिंह का कहना है कि इस बार धान का रकबा कम हुआ है। बारिश का भरोसा नहीं है। पहले फसल पकने के दौरान बारिश हो गई, जिससे नुकसान हुआ और अब रोपाई के समय बारिश नहीं हो रही है। ऐसे में किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। इस कारण धान के बजाए गन्ने को प्राथमिकता दी है।
किसान बोले, आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपया
खादर क्षेत्र के देवल गांव के किसान इंद्रजीत और राजा का कहना है कि बारिश नहीं होने के कारण सिंचाई से खर्च बढ़ रहा है। इसके अलावा धान में सूंडी और अन्य कीड़ों की बीमारियों से पिछले साल नुकसान हुआ। फसल पर लागत अधिक लगी और आमदनी नहीं हुई, जिस कारण इस बार गन्ने को प्राथमिकता दी है। समय पर बारिश नहीं होने के कारण परेशान हैं।
जानसठ तहसील में सबसे ज्यादा रकबा
जिले में जानसठ तहसील के खादर क्षेत्र में धान की रोपाई सबसे ज्यादा होती है। अन्य क्षेत्रों में अधिकतर किसान खाने के लिए सीमित मात्रा में ही रोपाई करते हैं।