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समितियों के खातों में भूल सुधार का इंतजार कर रही किसानों की गाढ़ी कमाई

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संजय गर्ग
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चरथावल (मुजफ्फरनगर)। तकनीकी गड़बड़ी और जागरूकता के अभाव में किसानों की करोड़ों रुपये की रकम समितियों के अनपेड खातों में पड़ी है। मामला सिर्फ एक या दो नहीं, बल्कि पिछले करीब 15 साल का है। अकेले रोहाना गन्ना समिति पर करोड़ों रुपये का भुगतान अनपेड खातों में पड़ा है। तकनीकी खामियों की वजह से किसान समिति से भुगतान नहीं ले पाते है। इस बार गन्ना विभाग से पर्यवेक्षक घर-घर जाकर किसानों को पुराने भुगतान लेने की जानकारी दे रहे हैं।
पिछले सत्र का ही 25 लाख बकाया
चरथावल ब्लॉक के किसान रोहाना गन्ना समिति से जुड़े है। खाईखेड़ी, तितावी, देवबंद, रोहाना और थानाभवन चीनी मिल को गन्ना आपूर्ति करते है। समिति सचिव एसपी सिंह ने बताया पिछले पेराई सत्र का ही करीब 25 लाख बकाया है। इस वर्ष के अलावा पिछले आठ पेराई सत्र का भुगतान समिति के अनपेड खाते में जमा है।
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केस एक : आठ साल बाद मिली बकाए की जानकारी
चरथावल पश्चिमी के किसान ताहिर और मारूफ का भुगतान करीब आठ साल से ज्यादा समिति पर बकाया है। जानकारी के अभाव वह भुगतान लेने समिति नहीं पहुंच पाए थे। गन्ना विभाग के पर्यवेक्षक ने उन्हें जानकारी दी कि वर्ष 2014-15 का करीब 31 हजार रुपये समिति में पड़ा है।
केस दो : पर्यवेक्षक पहुंचे तो मिली जानकारी
मुर्दा पट्टी निवासी किसान माहिर त्यागी ने बताया उनके मोहल्ले की करीब दर्जनों किसान ऐसे है, जिनका भुगतान किन्हीं कारणों से समिति से नहीं मिल
पाया था। हाल में पर्यवेक्षक ने उन्हें जानकारी देने के बाद मालूम चला है।
केस तीन : पौने चार लाख रुपये का भुगतान कराया
दूधली निवासी किसान का चार साल का करीब पौने चार लाख रुपये का भुगतान तकनीकी खामियों की वजह से बकाया था। समिति की ओर से जानकारी मिलने के बाद उन्हें भुगतान कराया गया है। दरअसल, किसान दिल्ली रहते है और उनके नाम से गन्ना आपूर्ति होता है। खाते में गड़बड़ी के कारण भुगतान लटक गया।
इन वजह से अनपेड खातों में पड़े रुपये
करीब 10 हजार किसानों की रोहाना समिति में ऐसे किसान है, जो बाहर रहकर नौकरी करते है। उनके नाम गांव में जमीन है। मिलों को गन्ना सप्लाई उनके परिजन या दूसरे किसान करते है। मगर, बैंक खातों में नाम त्रुटि या खतौनी अभिलेखों में नाम के अंतर के कारण बैंकों में भेजा गया, भुगतान समिति को वापस आ जाता है। जो किसान अपडेट रहते है, वो औपचारिकताएं पूरी कर भुगतान करा लेते है।
शपथ पत्र अथवा गन्ना पर्चियों से कराएं भुगतान
सचिव एसपी सिंह ने बताया कि आगामी वर्ष में इस तरह की समस्या को शून्य कराने की कोशिश है। जिन किसानों का भुगतान बाकी है, उनसे विभाग संपर्क कर रहा है। नाम में अंतर अथवा अन्य कारणों में शपथ पत्र अथवा पुरानी तौल पर्ची आदि की औपचारिकताएं पूरी कराकर भुगतान प्राप्त कर सकता है। खामियां दुरुस्त कराकर काफी किसानों ने भुगतान कराया है।
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जिले की आठ गन्ना समितियों के किसानों की सूची संबंधित पर्यवेक्षक को दी गई है। किसानों के पास भेजकर उन्हे अवगत कराया जा रहा है। किसानों का 15 साल से भी ज्यादा इस तरह का बाकी रकम समितियों के अनपेड खातों में अवशेष है। कार्रवाई पूरी कराने के बाद किसानों को इस बार शत प्रतिशत भुगतान कराने का प्रयास है। - डॉ आरडी द्विवेदी, जिला गन्ना अधिकारी
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