संवाद न्यूज एजेंसी
मोरना। सोलानी नदी में आई बाढ़ से फसलें डूब गई है। गन्ने, चारे और सब्जियों की फसल में नुकसान हुआ है। किसानों के नुकसान का आंकलन बाढ़ का पानी उतरने के बाद होगा, लेकिन फिलहाल चारे की समस्या खड़ी हो गई है।
खादर क्षेत्र के 30 गांवों में बाढ़ का पानी है। आबादी तक पहुंच गए पानी ने जंगलों में तबाही मचा दी है। चारे और सब्जी की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। गन्ने के खेतों में अगर पानी अधिक दिन तक रहा तो फसल को खतरा हो जाएगा। पशुपालकों के सामने चारे का संकट गहरा गया है। किसान सुबोध सैनी का कहना है कि सब्जी की फसलें बर्बाद हो गई हैं।
किसान मेहर चंद का कहना है कि चारे की फसल में सबसे अधिक नुकसान है। पशुपालकों के सामने सबसे बड़ा संकट है।
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इनसेट
गैर आबाद गांवों से निकाले गए ग्रामीण
खादर के गैर आबाद गांव लुकादडी, हाजीपुर बरामदा, शाहजहांपुर, भगवतीपुर, मुस्तफाबाद, पुरुषोत्तमपुर ,मोहनपुर, लतीफपुर मे पानी के बीच फंसे सैकड़ों किसान मजदूरों को मोटर बोर्ड द्वारा निकाला गया। मोटर बोट में बैठ कर आए शिवपुरी से सीतापुर के मजदूर भानु प्रताप मनोज शिवकुमार अवधेश विपिन अनिल विजय दिवाकर आदि के चेहरे पर बाढ़ के पानी का खौफ साफ दिखाई दिया।
इंछावाला के लोगों ने खादर छोड़ने से किया इन्कार
लेखपाल रमेश कुमार ने बताया कि बिजनौर के गांव इंच्छावाला के ग्रामीणों ने आने से इन्कार कर दिया है। कुछ लोग आए थे, लेकिन इसके बाद ग्रामीणों ने कहा कि अभी वह यहीं पर रहेेंगे।
कांवडि़ये भी फंस गए बाढ़ में
लक्सर-भोकरहेड़ी मार्ग से आ रहे कांवडिये भी बाढ़ के पानी में फंस गए। मजलिसपुर तौफिर के प्रधान योगेंद्र चौहान ने कड़ी मशक्कत कर निजी वाहनों से कांवडिय़ों को निकालने में मदद की।