मुजफ्फरनगर। मानसिक स्वास्थ्य दुरुस्त रखने के प्रति लोगों को सजगता दिखानी होगी। दौरा पड़ने की समस्या होने पर अधिकांश लोग मनोचिकित्सक की बजाए तांत्रिक के पास पहुंच जाते हैं। जब तक वह चिकित्सीय इलाज के लिए जाते हैं, तब तक स्थिति ज्यादा खराब हो जाती है। तेज बुखार, संक्रमण या चोट से भी दौरा पड़ सकते हैं।
दौरे की समस्या छोटे बच्चों से लेकर बड़ों तक, सभी में हो रही है। ऐसे में मानसिक बीमारियों का इलाज कराने अस्पताल जाने के बजाए लोग कई बार तांत्रिकों के पास झाड़फूंक कराने पहुंच जाते हैं। इसकी पुष्टि खुद जिला अस्पताल के चिकित्सक कर रहे हैं।
स्वामी कल्याण देव जिला चिकित्सालय के मनोचिकित्सक डॉ. अर्पण जैन का कहना है कि दौरे के मरीज पहुंचते हैं, लेकिन इनमें अधिकांश केस वे होते है, जो पहले सालों तक झाड़ फूंक के चक्कर में पड़े रहे हैं। कम पढ़े लिखें परिवारों और ग्रामीण अंचल में यह समस्या ज्यादा है।
उन्होंने कहा कि दौरा पड़ने के कई कारण हो सकते है। न्यूरोट्रांसमीटर का असंतुलन, आनुवंशिकी, मस्तिष्क का ट्यूमर, तेज बुखार, संक्रमण या चोट से मस्तिष्क क्षति सहित कई सारी वजहों से दौरा पड़ जाता है। दौरा पड़ने पर मरीज अजीबो-गरीब हरकतें करता है, जिससे परिजन समझ नहीं पाते है।
केस एक
दो साल तक तंत्र मंत्र कराता रहा परिवार
मखियाली के निवासी एक परिवार के करीब 7 साल के बच्चे को दौरा पड़ने की दिक्कत है। जिसका उपचार जिला चिकित्सालय में चल रहा है। चिकित्सक का कहना है कि बच्चे को परिवार ने चिकित्सक को नहीं दिखाया, बल्कि करीब दो साल तक तांत्रिक क्रियाओं में लगे रहे। गांव के ही अन्य व्यक्ति ने उन्हें मनोचिकित्सक दिखाने के लिए प्रेरित किया।
केस दो
ऊपरी बताकर झाड़ फूंक करते रहे तांत्रिक
खालापार निवासी युवक ने बताया कि उसके 25 वर्षीय भाई को पिछले एक साल दौरे पड़ने की समस्या है। शुरुआत में जब दौरा पड़ा तो परिजनों ने उसमें ऊपरी की दिक्कत समझी और अलग-अलग तांत्रिक व बाबा के पास जाकर झाड़ फूंक कराते रहे। करीब 15 दिन पहले ज्यादा दिक्कत होने पर अब उसे अस्पताल में दिखाया गया। फिलहाल भाई को आराम है।
केस तीन
झाड़
फूंक के चक्कर में दो बार बंद किया इलाज
चिकित्सक ने बताया कि छपार क्षेत्र के एक परिवार ने बेटी का इलाज झाड़ फूंक के चक्कर में दो बार बंद कर दिया है। अब तीसरी बार फिर से उपचार शुरू किया गया। उन्होंने कहा कि उनकी 18 साल की बेटी को करीब तीन साल से दौरे आते हैं। शुरू में मोहल्ले के चिकित्सक को उसे दिखाया। फिर झाड़ फूंक के लिए किसी बाबा के पास गए। ऐसे में प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराया और दो बार इलाज छोड़ने के बाद अब तीसरी बार सरकारी अस्पताल से इलाज शुरू हुआ है। फिलहाल बेटी की हालत ठीक है।