- राष्ट्रीय मिर्गी दिवस : लंबे उपचार के बाद बीमारी को किया जा सकता है ठीक
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संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। मिर्गी को लेकर कई तरह की भ्रांतियां हैं। लोग मिर्गी रोगी को चिकित्सक को दिखाने की बजाय, जादू-टोने और झाड़-फूंक के चक्कर में लग जाते हैं, ऐसे में कई बार मरीज की जान तक चली जाती है। चिकित्सकों का कहना है कि मिर्गी रोगी का करीब तीन साल तक उपचार चलता है। इसके बाद बीमारी पूरी तरह से ठीक हो जाती है।
मस्तिष्क में ट्यूमर, संक्रमण, घाव या चोट, टीबी गांठ, कीड़े की गांठ आदि मिर्गी की बीमारी की वजह हो सकती हैं। दौरा पड़ने और अजीबो-गरीब हरकत करने पर अधिकांश लोग मरीज की झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ जाते हैं, जो सही नहीं है। जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. योगेंद्र त्रिखा ने बताया कि दौरे पड़ने पर चिकित्सक की सलाह लेकर जांच करानी चाहिए। जांच रिपोर्ट में जरूर कुछ न कुछ निकलता है। उन्होंने कहा कि जिले में अधिकांश लोग मिर्गी रोगियों को दवा दिलाने के बजाय झाड़-फूंक में लग जाते हैं। उन्होंने कहा कि जिला चिकित्सालय में मिर्गी रोगियों को दवा दी जाती है।
महीने में करीब 50 मिर्गी मरीज जिला चिकित्सालय में उपचार कराने के लिए आते हैं। उन्होंने कहा कि मस्तिष्क में ट्यूमर, संक्रमण, घाव या चोट, टीबी गांठ, कीड़े की गांठ, अत्यधिक शराब या नशीली दवाओं का सेवन आदि से मिर्गी की बीमारी हो सकती है। इसलिए जांच करानी चाहिए। मिर्गी के मरीजों की करीब तीन साल तक दवा चलती है। कई बार मरीज को दौरे की दिक्कत हो जाती है, उसकी जीवन भर दवा चलती है।
यह है मिर्गी के लक्षण
- कुछ समय के लिए कुछ भी याद नहीं रहना
- अचानक खड़े-खड़े गिर जाना
- बार-बार एक जैसा व्यवहार करना
- अचानक से डर जाना और बात करने में असमर्थ होना।
- छूने, सुनने या सूंघने की क्षमता में अचानक बदलाव आना।
- चक्कर आना।
- मेमोरी लॉस होना।