मुजफ्फरनगर। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भाजपा सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश किया। बजट पर निगाह टिकाए बैठे पेपर उद्यमियों का कहना है कि बड़ी राहत की उम्मीद थी। सरकार को आयात पर कस्टम ड्यूटी लगानी चाहिए थी, लेकिन इस पर कदम नहीं उठाया गया।
पेपर मिल एसोसिएशन की प्रदेश इकाई के चेयरमैन पंकज अग्रवाल कहते हैं कि पेपर उद्योग को बजट से उम्मीद थी, लेकिन सरकार ने बदलाव नहीं किया। कई देशों से व्यापारिक संधियां हुई है, जिससे उन देशों का कागज बिना कस्टम ड्यूटी लगे आयात हो रहा है। भारत के काग़ज़ उद्योग पर संकट के बादल छाए हुए हैं। सरकार को आयात पर कस्टम ड्यूटी लगानी चाहिए। जिससे यहां का काग़ज़ उद्योग नुक़सान से बाहर आ सके। बिना कस्टम ड्यूटी के इंडोनेशिया, थाईलैंड, जापान, मलेशिया, कोरिया से तैयार पेपर आ रहा है।
पेपर उद्यमी अमित गर्ग का कहना है कि पेपर उद्योग के लिए कुछ नहीं हुआ है। उम्मीद थी कि पेपर पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढेगी, जिससे हमारे मॉल की डिमांड बढ जाती। सरकार ने इसमें कुछ नहीं किया। पेपर पर जीएसटी भी कम नहीं हुई है।
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रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद : गोयल
आईआईए के अध्यक्ष पवन कुमार गोयल का कहना है कि सरकार ने कृषि, रोजगार, शहरी विकस, ऊर्जा सुरक्षा और अनुसंधान पर जोर देकर उम्मीद की है कि जीडीपी सात प्रतिशत तक पहुंचेगी। मुद्रा लोन, प्लग और प्ले औद्योगिक पार्कों, सिडबी द्वारा एमएसएमई क्लस्टर एवं संकट की स्थिति में बैंक ऋण से माइक्रो स्मॉल यूनिट को लाभ मिलेगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
एमएसएमई के लिए क्रेडिट गारंटी स्कीम सही : कुशपुरी
आईआईए के पूर्व अध्यक्ष एवं उद्यमी कुशपुरी का कहना है कि रोज़गार,कौशल विकास व शिक्षा ऋण के लिए की गई घोषणा उत्साहजनक है। इनकम टैक्स की दरों में परिवर्तन अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। एमएसएमई के लिए क्रेडिट गारंटी स्कीम व तकनीकी सहायता पैकेज सही है, इससे एमएसएमई को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने की राह खुलेगी।
केंद्र सरकार का यह औसत बजट
भीमसेन कंसल का कहना है कि बजट औसत है। वित्तमंत्री ने वेतन भोगियों को सामान्य राहत देते हुए स्टैण्डर्ड डिडक्शन रूपये 50,000 से बढाकर 75,000 कर दिया हैं, इसके अतिरिक्त मुद्रा लोन कि सीमा को 10 लाख से बढाकर 20 लाख कर दिया हैं। मुज़फ्फरनगर मे लोहा व पेपर इंडस्ट्री पर सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा हैं।
फोटोउद्यमी भीमसेन कंसल का कहना है कि बजट औसत है। वित्तमंत्री ने वेतन भोगियों को सामान्य राहत देते हुए स्टैण्डर्ड डिडक्शन रूपये 50,000 से बढाकर 75,000 कर दिया हैं, इसके अतिरिक्त मुद्रा लोन कि सीमा को 10 लाख से बढाकर 20 लाख कर दिया हैं। मुज़फ्फरनगर मे लोहा व पेपर इंडस्ट्री पर सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा हैं।