संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। डीआर टीबी रोगियों के लिए अब जिले में ही जांच और उपचार की सुविधा शुरू हो गई है। अब उन्हें जांच के लिए मेरठ या अन्य जगह जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। बेगराजपुर मेडिकल कॉलेज में इसके लिए वार्ड बनाया गया है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. लोकेश चंद्र गुप्ता ने बताया कि डीआर टीबी (ड्रग–रेसिस्टेंट ट्यूबरकुलोसिस) सामान्य टीबी से गंभीर होती है। इसकी दवा भी पूरी तरह से जांच कराने के बाद शुरू की जाती है। इसके लिए पहले मरीजों को मेरठ मेडिकल कॉलेज और इसके बाद पुष्टि के लिए नमूने आगरा और अलीगढ़ भी भेजे जाते थे। अब यह सुविधा बेगराजपुर मेडिकल कॉलेज में भी शुरू कर दी गई है।
उन्होंने बताया कि डीआर टीबी वाले मरीजों को लक्षण के आधार पर एक दिन के लिए वार्ड में भर्ती किया जाता है, इसके बाद विशेषज्ञ चिकित्सक उनकी जांच कराते है। पुष्टि होने पर उनकी दवा और उसकी प्रक्रिया जिला चिकित्सालय में भेजी जाती है। यहां से डीआर टीबी के रोगी को दवा दी जाती है। फिलहाल जिले में डीआर टीबी से 333 मरीज ग्रसित हैं। जिनका उपचार जारी है। उन्होंने कहा कि जिले को टीबी मुक्त बनाने के लिए विशेष रूप से कार्यक्रम चलाया जा रहा है। टीबी फ्री पंचायत कार्यक्रम के तहत तेजी से कार्य किया जा रहा है।