82 दिन में पाए गए टीबी के 1869 मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। अगर टीबी के लक्षण है तो घबराए नहीं, बल्कि उपचार कराएं। जिले में जनवरी 2023 से अब तक 1869 मरीज टीबी के पाए गए। जिनका इलाज शुरु कर दिया गया है। इनमें से 97 प्रतिशत मरीजों की एचआईवी जांच भी कराई जा चुकी है, जबकि 96 प्रतिशत मरीजों की शुगर जांच हुई। 700 से ज्यादा मरीजों का यूनिवर्सल ड्रग सेंसिटिविटी टेस्ट भी कराया जा चुका है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. लोकेश चंद गुप्ता ने बताया कि सामान्य मरीजों का छह माह और गंभीर मरीजों का नौ माह तक इलाज चलता है। 2022 से अब तक के 4411 टीबी मरीजों का इलाज चल रहा है। सितंबर 2022 तक के 4441 मरीजों का सफलतम उपचार किया जा चुका है। वह टीबी से मुक्त हो चुके है। उन्होंने कहा कि टीबी से घबराने की जरूरत नहीं है।
कई तरह की होती है टीबी
जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया कि वैसे तो सबसे खतरनाक फेफड़ों की टीबी होती है। इसके अलावा गांठ, पेट, हड्डी, आंख और खाल वाली टीबी भी होती है, जिनका इलाज लंबे समय तक चलता है। बाल और नाखून को छोड़कर टीबी कहीं भी हो जाती है।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
डॉ. लोकेश चंद गुप्ता बताया कि टीबी होने पर मरीज से दूरी बनाकर ही रखें। खांसी की हवा दूसरे तक नहीं पहुंचनी चाहिए। इसी के साथ मरीज को चिकनाई का परहेज करना चाहिए। धूल-मिट्टी से बचकर रहें। खाने में कम से कम मिर्च का प्रयोग करें। खांसी होने पर चिकित्सक से परामर्श लें। ज्यादा लंबे समय तक खांसी होने पर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।
जिले में टीबी उपचार की पूरी व्यवस्था: सीएमओ
मुजफ्फरनगर। जिला चिकित्सालय के जिला रेडक्रास भवन में पत्रकार वार्ता में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. महावीर सिंह फौजदार ने बताया कि जनपद में 16 टीबी यूनिट, 32 माइक्रोस्कोपिक सेंटर और 54 पीएचआई एनटीईपी कार्यक्रम से जुडे़ है, जिसमें बलगम की जांच एवं उपचार प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिले में टीबी उपचार की पूरी व्यवस्था है। सीबीनैट जांच सुविधा जिला क्षय रोग केंद्र उपलब्ध है। इस दौरान जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. लोकेश चंद गुप्ता और जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी डॉ. गीतांजलि वर्मा भी मौजूद रहीं।