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लोकतंत्र खत्म, पार्टियों को तोड़ रही सरकार : राकेश टिकैत

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सिसौली पंचायत को संबो​धित करते भाकियू प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत
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सिसौली (मुजफ्फरनगर)। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार धरातल पर काम नहीं करती। चुनाव से पहले बिजली मुफ्त देने की बात कही थी। सरकार देश को बेचने का काम कर रही है, डरा धमकाकर जबरदस्ती संगठन और पार्टियों को तोड़ रही है। देश में लोकतंत्र खत्म कर दिया है, अपनी बात कहने वालों पर मुकदमे थोपे जा रहे हैं। 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में सचेत रहने की जरूरत है। युवा कार्यकर्ताओं से कहा कि संगठन चलाना आरएसएस से सीख लो, अच्छे गुण कहीं से भी सीख सकते हैं। आरएसएस के लोगो को अपने बीच में न घुसने दो।
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किसान भवन पर आयोजित मासिक पंचायत में राकेश टिकैत ने कहा कि किसान की 10 साल बाद नया ट्रैक्टर खरीदने की हैसियत नहीं है, आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। गन्ने का भुगतान नहीं हो रहा है। खेती में इस्तेमाल होने वाली दवाई महंगी हो रही है। सरकार की नजर किसानों की जमीन पर है, जमीन रात के अंधेरे में बिक जाएगी। फसल दिन के उजाले में भी नहीं बिकेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संगठन मजबूत करने और पौधरोपण के लिए प्रेरित किया।
इस मौके पर मास्टर ओमपाल सिंह, देश खाप चौधरी सुरेंद्र सिंह, ठाकुर जगत सिंह, अभिजीत बालियान, रविंद्र मुखिया, धीरज लाटियान ,थानेदार श्याम सिंह मलिक, महिपाल मलिक, दयानंद त्यागी, गौरव टिकैत आदि मौजूद रहे। संचालन ओमपाल सिंह ने किया।
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- जगबीर सिंह की हत्या अफसोसजनक थी : टिकैत
सिसौली। भाकियू प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि हत्या की घटना अफसोसजनक है। लेकिन गलत नामजदगी हुई। न्यायालय का फैसला 20 साल बाद आया। न्यायालय का सम्मान है। यह न किसी की हार है और न ही जीत है। न्यायालय में हमने अपना पक्ष रखा, न्यायालय ने हमारा पक्ष स्वीकार किया ।

- हमारे परिवार से ही थे जगबीर सिंह : टिकैत
सिसौली। भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने किसान भवन में आयोजित मासिक पंचायत में कहा कि सच्चाई की जीत हुई है। 20 साल के दौरान बहुत कुछ अनुभव हुआ है। इसी दौरान पिता चले गए, मां भी नहीं रहीं। पूरी जवानी मुकदमे में चली गई। अदालत में सच्चाई की जीत हुई है कोई खुशी की बात नहीं है, मरने वाला व्यक्ति हमारे रघुकुल परिवार का ही था। पता नहीं क्या सोच कर नाम लिखवा दिया। झूठे, सच्चे मुकदमों के कारण बहुत लोग दुखी हैं। न्यायालय पर पूरा भरोसा था, देर है अंधेर नहीं। बस अब यह मामला यहीं खत्म होना चाहिए।
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