देवबंद। दशलक्षण पर्व के नौवें दिन नगर के चारो जैन मंदिरों में उत्तम अकिंचन धर्म की विशेष पूजा अर्चना की गई। प्रदीप शास्त्री ने बताया कि परिवस्तुओं का त्याग कर आत्मा के प्रति समर्पित होना ही उत्तम आकिंचन धर्म है।
भगवान श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर सरागवाड़ा, मंदिर जी बाहरा, मंदिर जी नेचलगढ़ और भगवान श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर कानूनगोयान में बृहस्पतिवार को श्रद्धालुओं ने उत्तम अकिंचन धर्म के मार्ग पर चलने की शिक्षा ग्रहण की। इस मौके पर मंदिर में श्रीजी का सहस्त्र कलशों से अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजन और दशलक्षण धर्म के अंतर्गत उत्तम आकिंचन धर्म की पूजा की गई। आचार्य प्रदीप शास्त्री पीयूष ने कहा कि इस संसार में कोई भी वस्तु आजीवन किसी के लिए नहीं हो सकती। इसलिए मनुष्य को तीर्थंकरों की वाणी पर ध्यान देते हुए निरंतर उनकी भक्ति करते रहना चाहिए। वहीं बुधवार की रात्रि श्री दिगंबर जैन मंदिर बाहरा में महाआरती के उपरांत बूझो तो जानें पहेली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें विजेताओं को उपहार देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर मुकेश जैन, मोना जैन, रूची जैन, बबीता जैन, अतुल जैन, विकास जैन, अजय जैन, संध्या जैन, संगीता जैन, नितिका जैन, पायल जैन, अंकित जैन शुभम जैन आदि रहे।