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Muzaffarnagar News: ब्रह्मलीन स्वामी ज्ञान भिक्षुक दास महाराज की पुण्यतिथि आज

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शुकतीर्थ स्थित स्वामी समनदास आश्रम का मुख्य द्वार।
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सत्संग समागम के लिए पहुंचने शुरू हो गए श्रद्धालु
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संवाद न्यूज़ एजेंसी
मोरना (मुजफ्फरनगर)। तीर्थ नगरी शुकतीर्थ स्थित संत शिरोमणि रविदास सतगुरु समनदास आश्रम में ब्रह्मलीन स्वामी ज्ञान भिक्षुक दास महाराज की पुण्यतिथि पर शनिवार से सत्संग समागम शुरू होगा। सत्संग में देश भर से लाखों अनुयायी जुटेगें। अनुयायियों का पहुंचना शुरू हो गया है। विशाल पंडाल लगाया गया है।

संयोजक प्रबंधक महात्मा गोरधन दास महाराज ने बताया कि अखिल भारतीय संत शिरोमणि रविदास सतगुरु समनदास मिशन के तत्वावधान में तीन और चार जून को ब्रह्मलीन स्वामी ज्ञान भिक्षुक दास महाराज की पुण्यतिथि श्रद्धा के साथ मनाई जाएगी। शनिवार को हरिदास समाधि से बैंडबाजों के बीच शोभायात्रा शुरू होगी। रात्रि में विशाल सत्संग का आयोजन होगा। चार जून सुबह विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इसमें भाग लेने के लिए देश के विभिन्न प्रांतों से अनुयायियों का पहुंचना शुरू हो गया है। अनुयायियों के लिए विशाल पंडाल लगाए गए है। खाने पीने की व्यवस्था अलग से की गई है।
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समाज के उत्थान के लिए छोड़ दी थी अंग्रेजी फौज की नौकरी

भोपा। स्वामी ज्ञान भिक्षुक दास महाराज का जन्म 1848 में मेरठ के गांव अख्तियारपुर में हुआ था। उनके पिता का नाम पांचा दास और माता का नाम सांवली देवी था। वह अंग्रेजी फौज में भर्ती हो गए। कुछ समय बिताया, लेकिन उनके मन में जो समाज के उत्थान की लो जगी थी, जिस कारण वापस लौट आए।



उन्होंने मामचंद दास को आपको अपना गुरु बनाया। उनसे मिले ज्ञान के चलते वह गुरु रविदास मिशन के कार्य में लग गए। 50 वर्ष की आयु में वे नेपाल गए। नेपाल के शाह वंश के सातवें राजा पृथ्वी वीर विक्रम शाह ने ज्ञान भिक्षुक महाराज के आत्मज्ञान से प्रभावित होकर सम्मानित किया। बताते हैं कि उन्होंने करीब 110 वर्ष की उम्र में कस्बा ऊन में समाधि ले ली थी। उनके नाम पर आज भी ऊन में एक विशाल मंदिर बना हुआ है।

स्वामी समनदास महाराज का शुकतीर्थ से पुराना नाता



भोपा। जैसे ही हम शुकतीर्थ में प्रवेश करते है, वहां स्वामी हरिदास की समाधि नजर आती है। स्वामी समनदास महाराज बाल अवस्था में गुरु की तलाश में उनके पास शुकतीर्थ पहुंच गए। हरिदास महाराज द्वारा उनके चेहरे के तेजस्व को पहचान उन्हें सम्मान से आसन पर बैठाया और बोले कि वह इस योग्य नहीं हैं। इस योग्य स्वामी ज्ञान भिक्षुक महाराज है। उन्हीं के कहने पर वह स्वामी ज्ञान भिक्षुक दास के पास पहुंचे। गुरु की शरण में जाकर स्वामी समनदास महाराज ने कांधला के गांव भभीसा और खेड़ी करमू गांव में 41 दिन तक खड़ी तपस्या भी की। स्वामी गुरु ज्ञान भिक्षुक महाराज ने स्वामी समनदास महाराज की भक्ति, आस्था और मानव जीवन के प्रति समझदारी को देखते हुए उनका नाम हुकम चंद से समनदास रख दिया था।
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रविदास मिशन गद्दी के प्रबंधक स्वामी गोवर्धन दास महाराज बताते हैं कि गुरुजनों के नाम पर सैकड़ों मंदिर, विद्यालय संचालित है। गुरु गद्दी शुकतीर्थ में ऐतिहासिक गुरु गद्दी ( आश्नम) का निर्माण कार्य जारी है।
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