पुलिस अभिरक्षा में महिमा के पिता और भाई।
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महिमा विश्वकर्मा आत्महत्या केस में मुख्य आरोपी युधिष्ठिर की जमानत याचिका जिला कोर्ट से खारिज हो गई है। जनपद न्यायाधीश डॉ गोकुलेश की अदालत ने पिता-पुत्र को बंधक बनाकर उत्पीड़न करने और मृतका छात्रा को बेइज्जत करने की धमकी देने को गंभीर अपराध मानते हुए बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज कर दिया।
नई मंडी कोतवाली के अंकित विहार निवासी महिमा विश्वकर्मा पुत्री देवप्रकाश ने आरोपियों की धमकी के बाद 16 फरवरी को अपने आवास पर फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। झांसी मंडल के ललितपुर जिले के माता टील्ला डैम पर मृतका का पिता बतौर सुपरवाइजर काम करता था। सात फरवरी को लखनऊ से मछली बिक्री का भुगतान ललितपुर ले जाते समय जहर खुरानी गिरोह ने रकम लूट ली थी।
मामले में तब सुर्खियां पकड़ी जब महिमा की मां संजू देवी ने नामजद आरोपियों पर पति देवप्रकाश और पुत्र अक्षय को बंधक बनाने की तहरीर पुलिस को दी। पुलिस अफसरों ने मामले में गंभीरता नहीं बरती। पिता से लूटी गई रकम को वसूलने के लिए आरोपियों ने मां संजू देवी और बेटी महिमा पर दबाव बनाया था। बीकॉम की छात्रा की आत्महत्या के मामले पर जनाक्रोश भड़का तो एसएसपी ने 17 फरवरी को चार आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी थी।
मामले की जांच क्राइम ब्रांच को दे दी गई थी। पुलिस ने मुख्य आरोपी पचेंडा निवासी युधिष्ठिर पहलवान को एक मार्च को जेल भेज दिया था। सीजेएम फर्स्ट के यहां से पहले ही जमानत रद्द हो गई थी। मंगलवार को जिला जला की अदालत में जमानत के लिए जिरह हुई। वादी पक्ष के अधिवक्ता अनिल जिंदल ने अपना पक्ष रखा। जिला जज डॉ गोकुलेश ने सुनवाई के बाद आरोपी की जमानत याचिका निरस्त कर दी। बताते चलें कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने मामले में महिमा विश्वकर्मा के परिवार को न्याय दिलाने और आर्थिक मदद के लिए राज्यपाल राम नाइक को संस्तुति की थी।