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भाई की हत्या के बाद अब बदमाशों के निशाने पर था ट्रांसपोर्टर

Sun, 17 Jun 2018 11:50 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
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पुलिस की गोली लगने से घायल हुआ बदमाश। - फोटो : अमर उजाला
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खतौली में गिरफ्तार बदमाश अनिल गुर्जर का खतौली के व्यापारियों में जबरदस्त खौफ रहा है। नौ साल पहले उसने रंगदारी नहीं देने पर ट्रांसपोर्टर देवेंद्र शर्मा के भाई सतीश शर्मा की हत्या कर दी थी। इस मामले में गवाही देने पर भी देवेंद्र को हत्या की धमकी दी गई थी। बदमाशों के खौफ से देवेंद्र ने इस मामले में गवाही नहीं दी थी और आरोपी कोर्ट से छूट गए थे। अब उनसे रंगदारी मांगी जा रही थी।       
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 वर्ष 2009 में बदमाश अनिल गुर्जर ने ट्रांसपोर्टर देवेंद्र शर्मा के छोटे भाई सतीश शर्मा से रंगदारी मांगी थी। रंगदारी नहीं देने पर अनिल गुर्जर ने अपने साथी बदमाश मेरठ के थाना दौराला क्षेत्र के गांव बसीपुरा निवासी बिजेंद्र उर्फ बब्बल पुत्र खेमचंद के साथ मिल कर सतीश शर्मा की उस समय गोली मार कर हत्या कर दी थी, जब वह नवीन मंडी के पास अपनी दुकान पर बैठे थे।

उस समय देवेंद्र शर्मा गोली लगने से बाल-बाल बच गए थे। इंस्पेक्टर अंबिका प्रसाद भारद्वाज ने बताया कि देवेंद्र शर्मा ने दोनों बदमाशों के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने कुछ दिन बाद दोनों बदमाशों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। 28 मई को बदमाश अनिल गुर्जर ने ट्रांसपोर्टर देवेंद्र शर्मा से फोन पर पांच लाख रुपये की रंगदारी मांगी थी।
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बदमाश ने रुपये नहीं देने पर गोली मारकर हत्या करने की धमकी भी दी थी। उसी दिन अनिल अपने साथी बदमाश को लेकर देवेंद्र शर्मा की दुकान पर भी रंगदारी लेने पहुंचा था। बदमाश फोन पर लगातार रंगदारी मांग रहा था। पीड़ित देवेंद्र शर्मा ने तीन जून को अनिल गुर्जर और उसके  साथी के खिलाफ थाने में रंगदारी का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस तभी से  अनिल गुर्जर के तलाश में लगी थी।                  

देवेंद्र को गवाही देने पर हत्या की धमकी दिलवाई थी                  
पुलिस ने बताया कि भाई सतीश शर्मा की हत्या का वादी खुद बड़ा भाई देवेंद्र शर्मा था। जेल में बंद रहते हुए बदमाश अनिल गुर्जर ने अपने साथियों से देवेंद्र शर्मा को धमकी दिलवाई थी। धमकी दी गई थी कि अगर उसने कोर्ट में गवाही दी तो अनिल उसकी हत्या करवा देगा। हत्या की धमकी से देवेंद्र शर्मा इतना भयभीत हो गया था कि वह कोर्ट में गवाही नहीं दे सका। इसलिए अनिल व उसका साथी बदमाश वर्ष 2016 में जेल से छूट गए थे।              

रंगदारी न देने पर कई व्यापारियों पर कराई थी फायरिंग                
जेल में बंद रहते हुए 2014 में अनिल गुर्जर ने अपने साथी बदमाशों से नगर के व्यापारी भगवती मित्तल व धीरेंद्र मित्तल से रंगदारी मंगवाई थी। रंगदारी नहीं देने पर अनिल के साथी बदमाशों ने व्यापारी पिता व पुत्र को गोली  मारकर घायल कर दिया था। नगर के ही एक राजनीतिक नेता से भी रंगदारी मांगने का मामला भी सामने आया था, जिसमें उसके  साथी गिरफ्तार हुए थे।

व्यापारी जुगल किशोर को भी रंगदारी नहीं देने पर गोली मारकर घायल कर दिया था। इन मामलों में भी अनिल गुर्जर पर मुकदमे दर्ज किए गए थे। पुलिस ने बताया कि बदमाश अनिल गुर्जर को कुछ सफेदपोश नेताओं का संरक्षण भी प्राप्त है, जिनकी वजह से बदमाश पुलिस की गिरफ्त में आने से बच रहा था।                  

हत्या, लूट व रंगदारी के 33 मुकदमे दर्ज                  
पुलिस ने बताया कि अनिल गुर्जर पर मेरठ के थाना मवाना, फलावदा, दौराला और खतौली थाने में हत्या, लूट व रंगदारी के करीब 33 मुकदमे दर्ज हैं। जबकि साथी बदमाश ज्ञान सिंह पर खतौली थाने में तीन संगीन मामलों के मुकदमे दर्ज हैं।

बदमाशों की पकड़ने वाली टीम में इंस्पेक्टर एपी भारद्वाज, एसएसआई योगेंद्र पंवार, एसआई कपिल देव, एसआई सुनील शर्मा, कांस्टेबल देवेंद्र सिंह, सोहनवीर सिंह, रोहताश, प्रमोद कुमार, विजय मावी, राहुल कुमार, जितेंद्र कुमार, नफीसूददीन शामिल रहे।                   
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