फास्ट ट्रैक कोर्ट (प्रथम) के न्यायाधीश राजेश भारद्वाज ने मंसूरपुर के स्क्रैप व्यापारी अरशद हत्याकांड में दो हत्यारों को फांसी की सजा सुनाई है। हत्यारों ने सात साल पहले व्यापारी का 20 लाख की फिरौती के लिए अपहरण किया और यातनाएं देकर उसकी हत्या कर दी थी। पुलिस ने इनकी निशानदेही पर व्यापारी की लाश बरामद की थी।
मंसूरपुर निवासी राशिद स्क्रैप व्यापारी हैं। उनका नेशनल हाईवे शाहपुर मोड़ पर दुकान और गोदाम है। उनका बेटा अरशद भी कारोबारी था। वारदात के दिन तीन अक्तूबर 2010 को अरशद (18) दुकान पर बैठा था, तभी उसके पास किसी का फोन आया कि कुछ स्क्रैप बेचना है। हमारे पास आकर स्क्रैप देख लो। अरशद अपने पिता से स्क्रैप देखने की बात कहकर बाइक लेकर चला गया था, मगर लौटकर नहीं आया।
देर शाम अरशद के ही मोबाइल फोन से उसके बड़े भाई वासिद के पास फोन आया। फोन करने वालों ने कहा कि अरशद का अपहरण कर लिया गया है, इसकी रिहाई के एवज में 20 लाख की फिरौती चाहिए, तुम्हारे भाई की बाइक वहलना चौक पर खड़ी है। बेटे का अपहरण होने पर पिता राशिद ने मंसूरपुर थाने पर फिरौती के लिए अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने जांच-पड़ताल के उपरांत वारदात के तीन दिन बाद छह अक्तूबर 2010 को सिखेड़ा थाना क्षेत्र के गांव फहीमपुर कलां निवासी तीन बदमाशों मोनू उर्फ चंद्रप्रकाश पुत्र पाला, नीटू पुत्र सुक्कड़ और जितेंद्र को गिरफ्तार कर उनकी निशानदेही पर फहीमपुर के जंगल में ओमपाल के खेत से अरशद की लाश बरामद की थी।
पुलिस ने तीनों को जेल भेजकर उनके खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। यह मुकदमा फास्ट ट्रैक कोर्ट (प्रथम) में चला। जिला सहायक शासकीय अधिवक्ता सीताराम आर्य और वादी के अधिवक्ता सत्येंद्र कुमार सिंह ने कोर्ट में 10 गवाह और सबूत पेश किए। न्यायाधीश राजेश भारद्वाज ने दोनों पक्षों को सुनते हुए 24 मार्च को अपहरण और हत्या में मोनू और नीटू को दोषी करार दिया था।
मंगलवार को अदालत ने मोनू और नीटू को फांसी की सजा सुनाई। मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद दोनों को जेल भेज दिया गया। उधर, अरशद की हत्या में शामिल रहा तीसरा आरोपी जितेंद्र तब नाबालिग था, जिस कारण इस मुकदमे के ट्रायल के दौरान उसकी फाइल को किशोर न्यायालय भेज दिया गया था। उसका मुकदमा अभी किशोर कोर्ट में लंबित है।