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एसडीएम पर आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मामला दर्ज

Sat, 04 Mar 2017 12:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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मृतक बिजेंद्र सिंह का फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
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एचसीपी बिजेंद्र आत्महत्या मामले में बेटे की तहरीर पर खरखौदा पुलिस ने मुजफ्फरनगर के एसडीएम सदर रामअवतार गुप्ता पर आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मामला दर्ज कर लिया है। शुक्रवार शाम बिजेंद्र के बडे़ बेटे अरविंद की तरफ से खरखौदा पुलिस को तहरीर दी गई थी। पुलिस के विशेषज्ञों ने सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग का मिलान करने का काम शुरू कर दिया है। 
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तहरीर में अरविंद ने कहा कि पत्रावली गुम होने के मामले में एसडीएम राम अवतार गुप्ता ने उसके पिता को आत्महत्या के लिए मजबूर किया। उसके बाद ही उसके पिता ने ये कदम उठाया। उसके पिता की सर्विस मात्र छह माह शेष थी। खरखौदा इंस्पेक्टर मनीष सक्सेना ने बताया कि तहरीर और सुसाइड नोट के आधार पर एसडीएम रामअवतार गुप्ता के खिलाफ आईपीसी 306 में मामला दर्ज किया गया है। मामले में जांच की जा रही है। पुलिस किसी दबाव में नहीं आएगी। पुलिस अधिकारियों ने शासन से इस मामले में अनुमति लेने के लिए प्रक्रिया शुूरू कर दी है।

क्या है आईपीसी 306
धारा 306 के तहत किसी व्यक्ति के लिए ऐसे हालात पैदा करना, दबाव डालना या मजबूर करना, जिससे वह आत्महत्या के लिए मजबूर हो जाए। यह गैर जमानती धारा है। इसके तहत दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को 10 साल तक की सजा जुर्माना हो सकता है। साथ ही इस केस की सुनवाई केवल सेशन कोर्ट या उससे ऊपर की अदालत में हो सकती है। क्रिमनल लॉ जानकारों के अनुसार ऐसे मामलों में सुसाइड नोट महत्वपूर्ण प्रमाण होता है, लेकिन उसके साथ साथ साक्ष्य और हालात भी जांच का विषय होते हैं। यह महत्वपूर्ण बिंदु होता है कि जो हालात सुसाइड नोट में दर्शाए गए हैं, क्या वे हालात वास्तव में थे।
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-एचसीपी बिजेंद्र आत्महत्या मामले में दर्ज किए गए मुकदमे की जांच में यदि एसडीएम सदर रामअवतार गुप्ता दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ सेवा नियमावली के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।  -दिनेश कुमार सिंह, डीएम, मुजफ्फरनगर 

- विवेचना और साक्ष्य के आधार पर एसडीएम के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एसडीएम ड्यूटी पर हैं तो शासन से अनुमति मिलते ही उनसे पूछताछ की जाएगी। मौके से बरामद सुसाइड नोट पर हैंड राइटिंग और हस्ताक्षर का मिलान भी मृतक बिजेंद्र के बैंक खाते और अन्य दास्तावेजों से किया जा रहा है।  -विनोद कुमार सिरोही, सीओ किठौर

एचसीपी की मौत में आला अधिकारियों ने भी साधी चुप्पी     
एसडीएम सदर पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए खुदकुशी करने वाले एचसीपी विजेंद्र सिंह की मौत का रहस्य गहराता जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारी चुप्पी साधे हुए है। हालांकि परिजनों की बातचीत में यह साफ संकेत मिला है कि मुकदमों की कुछ फाइलों को लेकर एचसीपी तनाव में थे। कलक्ट्रेट हो या तहसील सदर, हर तरफ एसडीएम कोर्ट में तैनात मोहर्रिर एचसीपी बिजेंद्र सिंह के आत्महत्या मामले में उनकी मौत को लेकर चर्चा है। मेरठ में मेडिकल थाना क्षेत्र के अशोक विहार में परिवार के साथ रह रहे बिजेंद्र ने बृहस्पतिवार को खरखौदा के काजीपुर गांव के शमशान घाट के पेड़ से लटककर खुदकुशी कर ली थी।

मरने से पहले उसने कापी में सुसाइड नोट भी लिखा था, जिसमें एसडीएम सदर रामअवतार गुप्ता पर मुकदमे की फाइल को लेकर शोषण का आरोप लगाया था। हापुड़ के सिंभावली थाना क्षेत्र के गांव मुक्तेश्वरा निवासी विजेंद्र की 15 दिन पहले ही खतौली से मुजफ्फरनगर एसडीएम कोर्ट में तैनाती हुई थी। अभी तक की तफ्तीश में मृतक के परिजनों ने स्वीकार किया है कि मुकदमे की फाइलों को लेकर बिजेंद्र सिंह तनाव में थे।

एसडीएम कोर्ट से पुरकाजी के नौशाद की जमानत की फाइल गायब होने पर अधिवक्ताओं ने हंगामा किया था। कच्चे कागजातों पर नौशाद को जमानत दे दी गई थी। हालांकि एचसीपी की खुदकुशी के बाद एसडीएम सदर रामअवतार गुप्ता ने शोषण के आरोपों से इंकार किया है। बिजेंद्र सिंह का जल्द ही रिटायरमेंट होना था। मोबाइल फोन की अंतिम कॉल डिटेल की जांच चल रही है। फिलहाल एचसीपी की मौत पर सवाल अनगिनत हैं, लेकिन प्रशासनिक अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।      
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