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प्रॉपर्टी के कारोबार में छिपा है सुबोध के कत्ल का राज        

Tue, 02 May 2017 12:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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सुबोध शर्मा की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
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मेरठ मेें की गई खतौली के सुबोध शर्मा की हत्या का राज प्रॉपर्टी और ड्रग्स के धंधे में छिपा है। इस हत्या में हुई नामजदगी ऐसे ही इशारे कर रही है। मृतक की जिनसे नजदीकियां थी, उन्हें भी हत्या का मुजरिम बनाया गया है। मेरठ विजिलेंस टीम ने सुबोध की शिकायत पर ही  27 जनवरी को जिले के औषधि निरीक्षक  राजेश कुमार यादव को कलक्ट्रेट में रिश्वत लेते समय रंगेहाथ गिरफ्तार किया था। वारदात के बाद से सभी नामजद आरोपी भूमिगत हो गए हैं।    
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जमीन विवादों में सुर्खियों में रहे सुबोध शर्मा की हत्या के पीछे कौन है, उस तक पहुंचना पुलिस के लिए चुनौती है। खतौली के मोहल्ला देवीदास निवासी शर्मा के मर्डर में दर्ज किए गए मुकदमे में आरोपियों की नामजदगी कई सवाल खड़े करती है। मृतक के भाई सुभाष शर्मा की तहरीर का इशारा प्रॉपर्टी और ड्रग्स विभाग पर केंद्रित है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिनसे सुबोध की नजदीकियां थी, उनके भी मर्डर में शामिल होने का आरोप है।

आरोपी खतौली के सुधीर शर्मा और औषधि लिपिक धर्मेंद्र कुमार से उसकी मित्रता थी। शनिवार रात मेरठ में हुई सुधीर शर्मा की भतीजी की शादी में ही सुबोध अपने बेटे प्रभव और बेटी अराध्या के साथ पहुंचा था। उसी शादी में बाबू धर्मेंद्र भी शरीक हुआ था। पिछले एक साल में ड्रग्स विभाग में सुबोध की आवाजाही बढ़ी हुई थी। सुबोध ने ओम साईं मेडिकोज के होलसेल के लाइसेंस के लिए नौ मार्च 2016 को औषधि निरीक्षक कार्यालय में आवेदन किया था।
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उसने लाइसेंस की एवज में 1.30 लाख की घूस ड्रग्स इंस्पेक्टर द्वारा मांगने की शिकायत 10 जनवरी को  एसपी सतर्कता अधिष्ठान मेरठ सेक्टर से की थी। शासन की अनुमति के बाद सुबोध की शिकायत पर 27 जनवरी को सीओ डॉक्टर राजीव कुमार के निर्देशन में विजिलेंस टीम ने कलक्ट्रेट में डीआई राजेश कुमार यादव को 50 हजार की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था। सिविल लाइन थाने में दर्ज हुए मामले में डीआई और सुभाष चंद्र को नामजद किया गया था। 

ढाई माह मेरठ जेल में रहे दोनों आरोपियों की जमानत हो चुकी है। फिलहाल डीआई यादव खाद्य औषधि प्रशासन लखनऊ निदेशालय से संबद्ध है। अन्य दो आरोपियों राजबीर सिंह उर्फ टीटू और दीपक बंसल के बीच जमीन विवाद और लेनदेन के मुद्दे उलझे रहे हैं। खतौली कोतवाली के रिकार्ड के मुताबिक मृतक के खिलाफ एक दर्जन से ज्यादा प्रॉपर्टी के मुकदमे दर्ज हैं। सुबोध की हत्या किसके इशारे पर हुई, हत्या की वजह क्या बनी, जैसे अनेक सवाल पुलिस की तफ्तीश का हिस्सा बने हुए हैं। प्रॉपर्टी डीलर के मर्डर से किसे क्या लाभ है और किसे नुकसान, यह भी पुलिस जानने में जुटी है। फिलहाल पुलिस नामजदों की तलाश में दबिश दे रही है और आरोपी भूमिगत हैं। मूल रूप से मैनपुरी निवासी डीआई यादव भी पुलिस को अपने ठिकाने पर नहीं मिले हैं। उनके फोन सर्विलांस पर लगाए गए हैं।              

मैरिज वीडियो और काल डिटेल खंगाली                   
मुजफ्फरनगर। मेरठ हाईवे स्थित नारायण फार्म हाउस में हुई शादी में सुबोध शर्मा की वीडियो और कॉल डिटेल के जरिए पुलिस हत्यारों तक पहुंच सकती है। दवा  कारोबारी खतौली निवासी सुधीर शर्मा की भतीजी की शादी में ड्रग्स विभाग के अफसर और व्यापारी जुटे थे। कातिलों का मकसद केवल सुबोध की हत्या करना था। उन्हें उसकी पल-पल की खबर थी। कहीं ऐसा तो नहीं कि हत्यारे भी मैरिज मंडप में ही हों, या फिर मंडप की पार्किंग में पहले से उसके आने का इंतजार कर रहे हों। जांच में उलझी पुलिस के लिए सच को तलाशना आसान नहीं है।                               

तीन माह से बंद है डीआई कार्यालय                  
मुजफ्फरनगर। डीआई रिश्वत प्रकरण के बाद कलक्ट्रेट में औषधि निरीक्षक के कार्यालय पर तीन माह से ताला पड़ा हुआ है। शासन ने किसी नए निरीक्षक की नियुक्ति नहीं की है। सहारनपुर की डीआई अनामिका जैन को जिले का अतिरिक्त चार्ज दिया गया था, लेकिन अभी तक उन्होंने भी कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। थोक और फुटकर लाइसेंस की पत्रावलियां लंबित पड़ी हैं। आरोपी लिपिक धर्मेंद्र कुमार पिछले दो दशक से ड्रग्स विभाग के मुजफ्फरनगर कार्यालय में ही तैनात है। अखिलेश सरकार में उसकी शिकायत हुई थी, लेकिन हाईकोर्ट के स्टे के आधार पर वह कुर्सी बचाने में कामयाब रहा। डीआई और लिपिक के आपसी विवाद भी सुर्खियां रहा।             
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