घासीपुरा की मर्डर मिस्ट्री के तार बागपत से पुलिस को मिली मुखबिरी से जुड़े हो सकते हैं। अभी तक घटना का यह रहस्य भी धुंधला है कि आखिर क्यों तीन बदमाशों ने खुद को गोली से उड़ा लिया, जबकि पुलिस का दावा है कि मुठभेड़ नहीं हुई थी। लाख कुरेदने के बावजूद पुलिस अफसर वारदात के पीछे की हिस्ट्री पर कुछ भी कहने को तैयार नहीं है।
वारदात के हालात संदिग्ध है। यही वजह है कि घासीपुरा के एक मकान की छत पर गोली का शिकार मिले शामली के मलैंडी गांव के गौरव, बागपत के बदरखा गांव के सचिन और गांगनौली गांव के दीपक राठी की मौत के पीछे के रहस्यों को लेकर अनगिनत सवाल हैं। घटना की रात 21 सितंबर को पुलिस किसकी मुखबिरी पर मौका-ए-वारदात पर पहुंची थी। अभी तक यह तथ्य उजागर नहीं हो पाया है।
कोई तो बात रही होगी, जो कि तीनों ने 11 दिन पहले घासीपुरा में किराए पर एक कमरा लिया था। जिस नीरज ने कमरा दिलाया, उसकी तीनों युवकों से कैसे मुलाकात हुई। बागपत और शामली से दूर किराए पर ठिकाना बनाने का उनका क्या मकसद था। नीरज वाकई फरार है या उसे योजना के तहत गायब रखा जा रहा है। वारदात को पांच दिन बीत चुके हैं, मगर पुलिस के हाथ नीरज से खाली है। पुलिस को मकान की दूसरी किराएदार महिला संगीता ने क्या बताया, तीनों की कब से घासीपुरा में आवाजाही थी।
हालांकि एसएसपी मानते हैं कि नीरज के गिरफ्त में आने के बाद घटना के कारण सामने आ सकते हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक घासीपुरा में मौत के चंगुल में फंसे तीनों बदमाशों की मुखबिरी के तार बागपत से जुड़े हो सकते हैं। वारदात के वक्त मकान की घेराबंदी में जो पुलिस फोर्स लगी थी, उसमें से खाकी के कई पहरेदारों की लोकेशन घटना की रात से पहले बागपत में बताई गई है। घटना के रहस्य मकड़ी के जाल की तरह उलझे हैं। कितना सच सामने आएगा, यह कहना अभी मुश्किल है। वैसे पुलिस की थ्योरी को लेकर सियासी और सामाजिक संगठन आक्रोशित है। तीन अक्तूबर को बुलाई गई महापंचायत के एलान से पुलिस प्रशासन की पेशानी पर बल पड़ गए है।