बिजनौर में चार हत्याओं के बाद जिले में भी ऐहतियातन चौकसी बरती जा रही है। तीन साल पहले कवाल में छेड़खानी के मामले को लेकर बवाल हो चुका है। यही बवाल बाद में दंगों का कारण बना, जिसमें 65 से अधिक बेगुनाहों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। छेड़खानी की घटनाएं अक्सर पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती बनती रही हैं।
बिजनौर की तपिश को जिले तक आने से रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। मिश्रित आबादी में विशेष चौकसी बरती जा रही है। जिले में छेड़छाड़ को लेकर पहले भी बवाल हो चुके हैं। तीन साल पहले कवाल में छेड़छाड़ के बाद तीन हत्याएं हुईं। हालांकि पुलिस रिकार्ड में इसका जिक्र नहीं है, लेकिन उस दौरान जितनी भी पंचायतें हुई, उनमें यही मुद्दा छाया रहा था।
इसके बाद भी कई ऐसे मौके आए, जब इस तरह की घटनाएं सामने आईं, लेकिन पुलिस प्रशासन की चौकसी के चलते मंसूबे कामयाब नहीं हो पाए। चरथावल के हैबतपुर में बस में छेड़छाड़, शहर कोतवाली का नया बांस में युवती से छींटाकशी, नावल्टी चौक पर स्कूल से लौट रही छात्र से छेड़छाड, छपार के छपरा में आशा का वीडियो वायरल करने पर आत्महत्या, खतौली के कैलावड़ा की युवती का वीडियो वायरल, कवाल, जसोई और वहलना में दूसरे संप्रदाय के युवक को घर बुलाकर हत्या करने जैसे कई मामले सामने आए, जो पुलिस की सूझबूझ के चलते
मामला शांत हो गया।
प्रशासन ने बढा़ई चौकसी
बिजनौर की घटना के बाद जिले की पुलिस भी अलर्ट हो गई है। कप्तान दीपक कुमार ने सभी एसओ को दंगारोधी उपकरणों के साथ गश्त करने और अफवाहें फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। पुलिस ने चौकसी बढ़ा दी है।
बिजनौर की घटना के बाद कप्तान ने जिले की पुलिस को अलर्ट कर दिया है। एसएसपी ने सभी थानाध्यक्षों को अपने-अपने क्षेत्र में दंगारोधी उपकरणों के साथ गश्त करने के लिए कहा। खुराफातियों पर निगाह रखने और मिश्रित आबादी वाली जगहों पर सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। अफवाहें फैलाने वाले और सोशल मीडिया पर गलत कमेंट करने वालों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई करने की बात कही।