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एक माह शहर में कातिल, पुलिस को नहीं हुई खबर

Sat, 13 Aug 2016 12:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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आसाराम बापू। - फोटो : अमर उजाला
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आसाराम के खिलाफ सरकारी गवाह बने रसोइए अखिल गुप्ता की हत्या के रहस्य से डेढ़ साल बाद परदा उठा है। कातिल एक माह तक शहर में रहकर अखिल की हत्या में जुटे रहे। हथियार लाते और ले जाते रहे, लेकिन पुलिस को भनक तक नहीं लगी। बकौल नीरज मौका-ए-वारदात पर बंदूक से गोली नहीं चली तो कार्तिक ने तमंचे से अखिल को निशाना बनाया। 
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नीरज ने पुलिस को बताया कि वारदात से एक माह पहले वह कार्तिक को लेकर शहर आया। बाद में तमराज, राहुल और बलवीर भी आ गए। सूत्रों के मुताबिक कई दिन रेकी करने के बाद कार्तिक हलदार ने अहमदाबाद आश्रम के वकील प्रवीण को फोन पर बताया कि जहां कत्ल किया जाना है, वह इलाका भीड़भाड़ वाला है, यहां तमंचे से काम नहीं चलेगा। इसके लिए बढ़िया हथियार चाहिए।

इसके बाद मास्टरमाइंड वकील प्रवीण ने कार्तिक और बलवीर को अहमदाबाद आश्रम में बुलाया। यहां दोनों को छत्तीसगढ़ से लाई गई स्पेशल बंदूक सौंपी गई। इस बंदूक की नाल को फोल्ड कर दोनों आरोपी गाजियाबाद के नंदग्राम आश्रम लेकर पहुंचे और इसके बाद पल्सर बाइक से मुजफ्फरनगर आए। बकौल नीरज, वारदात के दिन 11 जनवरी को पांचों आरोपी शाम साढ़े छह बजे अपने कमरे से निकल गए।
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सर्दी में हथियार चादर में छुपा रखे थे। बलवीर और राहुुल मीनाक्षी चौक के पास दुकान के नजदीक खड़े हो गए। नीरज तमंचा लेकर कुछ आगे खड़ा हो गया। कार्तिक और तमराज बाइक पर थे, जिसे तमराज चला रहा था। शाम सात बजे के आसपास अखिल दुकान बंद कर बाइक से घर से लिए चला तो बलवीर और राहुल ने कार्तिक को इशारा कर दिया। अखिल के पीछे कातिलों ने बाइक दौड़ा दी।

जानसठ बस अड्डे के पास कार्तिक ने स्पेशल बंदूक से गोली चलाई, लेकिन निशाना सही नहीं लग पाया। इसके बाद उसने तमंचा निकाला और अखिल को गोली मार दी। अखिल के गिरते ही बाइक सवार भाग निकले और बाइक को एक नाले के पास खड़ा कर दिया। बाद में सभी आरोपी पैदल अपने कमरे पर पहुंच गए। वारदात के बाद पुलिस चौकन्नी हो गई। शहरभर में नाकेबंदी कर चेकिंग चलती रही और आरोपी घर आकर सो गए।

अगली सुबह अखबार पढ़ा और कत्ल की तसल्ली करने के बाद सभी आरोपी बस में सवार होकर गाजियाबाद रवाना हो गए। वहां से अपने-अपने ठिकानों पर चले गए। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि अखिल की हत्या के लिए अहमदाबाद आश्रम से कई किश्तों में 40 लाख रुपये लिए गए, जो सभी ने आपस में बांटे। पूछताछ में नीरज ने पैसे मिलने से इंकार किया है। उसका कहना है कि वह आसाराम का भक्त है, उसने पैसा नहीं लिया।  

मैं तो कुदरत की मारी हुई हूं
कातिलों ने वारदात को बेहद शातिराना अंदाज में अंजाम दिया। उन्होंने रहने के लिए ऐसा मकान तलाश किया, जिसमें अकेली महिला रामोदेवी रहती थी। 80 साल की रामो के पति की मौत हो चुकी है। बाद में दो जवान बेटे भी चल बसे। पुलिस नीरज की शिनाख्त के लिए वहां पहुंची तो बुजुर्ग महिला घबरा गई। उसने नीरज को तो पहचान लिया, साथ ही कहा कि वह तो कुदरत की मारी हुई है, उसे इस केस में न फंसाया जाए। महिला ने यह भी कहा कि उसे घटना के बारे में कुछ नहीं पता। उसने तो जरूरत में कमरा किराए पर दिया था। आरोपियों ने महिला को एक फैक्ट्री में काम करने की जानकारी दी थी। 

तेरा क्या बिगाड़ा था हमने
डेढ़ साल से न्याय के लिए भटक रहे पिता नरेश गुप्ता और पत्नी वर्षा को भी पुलिस ने थाने बुलाकर कातिल नीरज से बात कराई। नरेश ने नीरज से सवाल किया कि हमने क्या बिगाड़ा था तेरा, क्यों बर्बाद कर दिया हमें। इस पर नीरज ने नजर नीचे करते हुए कहा कि उसे घटना का अफसोस है। बापू को बचाने के लिए उन्होंने यह काम कर दिया। कुछ देर बाद करने के बाद वर्षा और नरेश आंसू पोछते हुए अपने घर के लिए निकल गए। 

कासमपुर खोला का रहने वाला है नीरज
कातिल नीरज मीरापुर थाने के कासमपुर खोला गांव का रहने वाला है। गांव में उसके पिता मामचंद गुर्जर और तीन भाई-बहन रहते हैं। नीरज की शादी नहीं हुई है। मामचंद आसाराम का अनुयायी रहा है। बाद में उसने अपने बेटे नीरज को भी आसाराम के आश्रम दिखवाए। बाद में नीरज भी नंदग्राम आश्रम में नौकरी करने लगा। नीरज का आपराधिक इतिहास नहीं है। उसके पिता के नाम गांव में पांच बीघा जमीन है। पिछले सात-आठ सालों से वह गांव में एक-दो बार ही गया है। वारदात में नीरज का नाम सामने आने के बाद ग्रामीण हैरान हैं। 
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