साढ़े छह साल पहले शामली के कांधला के किवाना गांव में हुई मां और बेटी की हत्या के मामले में अदालत ने छह मुजरिमों को दोषी करार दिया है। एडीजे प्रथम की कोर्ट ने सजा सुनाने के लिए 15 मार्च की तारीख नियत की है। दोषी ठहराए गए लोगों ने जमीनी रंजिश में मां और बेटी की ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या कर दी थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार शामली जिले के कांधला थाना क्षेत्र के गांव किवाना में उक्त वारदात 20 सितंबर 2010 को हुई थी। मृतका राजेश के पति वीरसेन पुत्र लक्ष्मण निवासी मंगलौरा थाना झिंझाना ने हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। दर्ज कराई गई रिपोर्ट के अनुसार रघुवीरी के पास 42 बीघा जमीन थी, जिसे उसने गांव के ही नरेश पक्ष को बंटाई पर दे रखा था। रघुवीरी के कोई बेटा नहीं था, इसलिए उसने 20 बीघा जमीन अपनी बेटी राजेश पत्नी वीरसेन के नाम कर दी थी।
राजेश और वीरसेन अक्सर गांव किवाना आकर जमीन की देखरेख करते थे। नरेश पक्ष रघुवीरी की जमीन को कब्जाना चाहता था, जिसको लेकर दोनों पक्षों में रंजिश शुरू हो गई थी। घटना के दिन शाम को रघुवीरी अपनी बेटी राजेश के साथ खेतों से गांव लौट रही थी। गांव से पहले भट्ठे के पास आरोपियों ने दोनों मां-बेटी को घेर लिया और लाठी-डंडों से पिटाई कर दोनों की ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या कर दी थी।
इसी दौरान सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस को देखकर हत्यारोपी फरार हो गए थे। पुलिस ने ट्रैक्टर के पहिये के नीचे से कुचले हुए मां-बेटी के शवों को निकाला था। मृतका राजेश के पति वीरसेन की ओर से कांधला थाने पर नरेश, सुरेश, रामनिवास, देशपाल उर्फ मोटा पुत्रगण लखमी, काला पुत्र रामनिवास, सोनू पुत्र सुरेश और अक्षय पुत्र नरेश के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने सभी नामजद लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, तभी से सभी जेल में बंद हैं।
यह मुकदमा एडीजे प्रथम दिनेशचंद्र सिंह की अदालत में चला। जिला सहायक शासकीय अधिवक्ता जितेंद्र कुमार त्यागी ने अदालत में सात गवाह और सबूत पेश किए। न्यायधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए शुक्रवार को मां-बेटी की हत्या में नरेश, सुरेश, रामनिवास, देशपाल, काला और सोनू को दोषी करार दिया। अदालत ने सजा और जुर्माना सुनाने के लिए 15 मार्च की तारीख नियत की है। वारदात के दौरान सातवां आरोपी अक्षय नाबालिग था, जिसकी सुनवाई किशोर न्यायालय में विचाराधीन है।