तीन दिन से लापता इरशाद की हत्या से पूरा कवाल दहशत में है। तीन साल पहले कवाल से ही शुरू हुए दंगे का दर्द अभी भी लोगों के जेहन में ताजा है। इसीलिए पुलिस, प्रशासन भी इस मामले में बहुत फूंक -फूंककर कदम उठा रहा है। इसीलिए इरशाद के मामले की एसएसपी ने खुद कमान संभाली। रात में पूरे कवाल को छावनी में बदल दिया गया। एसएसपी ने पहले आरोपियों को दबोचा और बाद में मृतक पक्ष को विश्वास में लेकर शव को सुपुर्दे खाक कराया।
वर्ष 2013 में इसी तरह की एक घटना में मलिकपुरा निवासी दो ममेरे भाइयों सचिन और गौरव और कवाल निवासी शाहनवाज की हत्या कर दी गई थी। हत्या के बाद दंगा हुआ था। इरशाद की हत्या का सच सामने आते ही एसएसपी दीपक कुमार ने कोई गड़बड़ न होने पाए इसलिए रात में ही जानसठ, मीरापुर, भोपा, ककरौली, रामराज, सिखेड़ा, खतौली, नई मंडी, शहर कोतवाली की पुलिस फोर्स के अलावा भारी मात्रा में पीएसी बल तैनात कर दिया।
रात में ही शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद किसी को कुछ नहीं बताया गया। सुबह मृतक के परिजनों को पूरी घटना से अवगत कराते हुए पकड़े गए दो आरोपियों के बारे में बताया और भारी पुलिस बल के साथ शव को सुपुर्दे खाक कराया। इस सारे मामले के बीच कवाल को पूरी तरह से छावनी बना दिया गया था। शायद ही ऐसी कोई गली हो जहां फोर्स न तैनात रही हो। मृतक के चाचा मुस्तकीम ने बताया कि पुलिस ने शव को निकालने, पीएम कराने आदि के बारे में रात में किसी को कोई जानकारी नहीं दी।
ग्रामीण पुलिस फोर्स व पीएसी बल देख दंग रह गए
कवाल के ग्रामीण जैसे ही बृहस्पतिवार सुबह सोकर उठे तो गांव में भारी फोर्स की तैनाती देखकर दंग रह गए। गांव में जितने मुंह उतनी बातें और उतने ही सवाल। इरशाद की हत्या का पता चलने पर ग्रामीण एक बार को तो सहम ही गए और गांव में एक तरह से दहशत व्याप्त हो गई। कोई बात न हो जाए इस डर से अधिकतर ग्रामीण अपने घरों में ही दुबक गए। पूरे दिन पुलिस गांव में इधर से उधर दौड़ती रही।
ग्रामीणों के सहयोग को सराहा
एसएसपी दीपक कुमार ने बताया कि कवाल के लोगों ने ऐसे हालात में बड़ा ही संयम बरता। ग्रामीणों की तारीफ कर कप्तान ने कहा कि पुलिस ने पांच घंटे के भीतर वारदात को खोल दिया, लेकिन दोनों ओर के लोगों ने मामले को लेकर जो संयम बरता है उसके लिए ग्रामीणों को धन्यवाद करना जरूरी हैं।