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जैमर : बंदियों की मौज, आमजन की मुसीबत 

Fri, 01 Jul 2016 12:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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मुजफ्फरनगर जिला जेल - फोटो : अमर उजाला
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मुजफ्फरनगर जिला कारागार में सवा तीन करोड़ की लागत से लगाए गए जैमर से कोई लाभ नहीं हो रहा। बिजली के जाते ही बंदी मोबाइल ऑन कर लेते हैं। जैमर लगने के बावजूद जेल से फोन चलने के मामले सामने आ रहे हैं। वहीं दूसरी ओर जैमर की वजह से आधे शहर के सिग्नल मिलने बंद हो गए हैं, जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 
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प्रदेश की जेलों में अपराधियों द्वारा चलाए जाने वाले मोबाइल फोन पर लगाम कसने के लिए प्रदेश शासन ने करीब एक दर्जन जेलों में जैमर लगवाने का फैसला लिया था। जैमर लगाने के लिए सबसे पहले मुजफ्फरनगर की कारागार को चुना गया। हैदराबाद की एक प्राइवेट कंपनी को करीब सवा तीन करोड़ की लागत से जेल में छह जैमर लगाने का ठेका दिया गया।

दो माह की मेहनत के बाद तकनीशियनों ने कारागार के भीतर तय छह जगहों पर जैमर लगा दिए। पंद्रह दिन पूर्व सभी जैमरों को चालू कर दिया गया। जैमर चालू होते ही बंदियों के सामने फोन चलाने की दिक्कत आई। काट की तलाश की जाने लगी तो पता चला कि लाइट जाने पर जैमर बंद हो जाते हैं। बिजली जाते ही बंदियों के फोन चालू होने लगे हैं।
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अब हालात ये हैं कि कारागार की लाइट जाते ही बंदी अपने मोबाइल ऑन कर लेते हैं। सवा तीन करोड़ खर्च करने के बावजूद प्रशासन बंदियों के मोबाइलों पर अंकुश नहीं लगा पाया है। वहीं दूसरी ओर जेल में जैमर लगने से लगभग आधे शहर में नेटवर्क की दिक्कत आ रही है। कॉल ड्रॉप हो रही हैं और कई-कई घंटे सिग्नल गायब हो जाते हैं। ऐसे में बंदी मौज में हैं और शहर के लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। 

जेनरेटर लगने पर दूर होगी समस्या
जैमर को 24 घंटे चालू रखने के लिए जेल अधीक्षक राकेश सिंह ने शासन को पत्र लिखा है। बताया गया है कि जैमर हमेशा चालू रखने के लिए जेनरेटर की जरूरत है। इसके लिए आटोमैटिक जेनरेटर लगाया जाएगा, जो कि लाइट भागते ही स्वयं ही स्टार्ट हो जाया करेगा। 24 घंटे लाइट रहेगी तो कारागार में किसी भी तरह से फोन नहीं चल पाएगा। जेल में पहले से लगा हुआ जेनरेटर जैमर का लोड नहीं उठा पा रहा है। 

चंद्रहास के हत्यारोपी दूसरी जेलों में शिफ्ट
जिला कारागार में गत सप्ताह हुए बवाल में एक कैदी चंद्रहास की मौत हो गई थी। इस दौरान जेल में जमकर बवाल हुआ था। मामले की गूंज लखनऊ से लेकर दिल्ली तक पहुंची थी। यहां तक की जेलर और एक बंदीरक्षक तक को सस्पेंड कर दिया गया था। इस मामले में बैरक नंबर तीन के चार आरोपियों प्रमोद, शाहरुख, प्रदीप और सुक्खा के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था।

शासन ने इस मामले अब और सख्त कार्रवाई करते हुए आरोपियों में से प्रमोद और शाहरुख को मेरठ और प्रदीप, सुक्खा को सहारनपुर की जेल में शिफ्ट कर दिया है। अगले आदेश तक चारों इन्ही जेलों में रहेंगे। कुछ दिनों बाद चारों को पूर्वांचल की जेलों में शिफ्ट किया जाएगा। बुधवार देर रात चारों को तय जेलों के लिए रवाना कर दिया गया। 
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