जेल से मेडिकल कराने के लिए लाया गया एक बंदी जिला अस्पताल तिराहे पर हथकड़ी निकाल कर जेलकर्मियों को चकमा देकर भाग निकला। जेलकर्मियों के शोर मचाने पर लोगों ने बंदी का पीछा कर उसे हंडिया मोहल्ले के एक मकान से पकड़ लिया। बंदी के खिलाफ शहर कोतवाली में जेल के हेड वार्डन की तरफ से रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
जिला कारागार के हेड वार्डन उल्फत सिंह, जेल कर्मी अरविंद कर्दम व श्यामसुंदर गौतम बुधवार सुबह जेल के दो बंदियों को जिला अस्पताल में रूटीन मेडिकल कराने के लिए लेकर आए थे। इनमें कत्ल के मामले में जेल में बंद नावला निवासी विचाराधीन बंदी आदित्य त्यागी और वाजिद शामिल थे। मेडिकल कराने के बाद कर्मचारी दोनों बंदियों को लेकर जेल लौट रहे थे।
रास्ते में जिला अस्पताल तिराहे के पास स्थित एक होटल पर भोजन करने के लिए रुक गए। भोजन करने के बाद बंदी आदित्य त्यागी ने जेलकर्मियों को हाथ धोकर आने के लिए कहा। जेल कर्मियों ने अकेले ही वॉश बेसिन तक बंदियों को जाने दिया।
वहां हाथ धोने के दौरान बंदी ने किसी तरह हथकड़ी से अपना हाथ निकाल लिया, जिसके बाद उसने वहां से पुरानी घास मंडी की तरफ भाग खड़ा हुआ। बंदी को हथकड़ी से हाथ निकालकर भागते देख जेलकर्मियों के होश उड़ गए। जेल कर्मचारियों ने शोर मचाते हुए बंदी का पीछा करना शुरू कर दिया।
इस पर आसपास के लोग भी बंदी के पीछा करने लगे। बंदी आदित्य पास के हंडिया मोहल्ले के एक घर में घुस गया। सूचना पर पुलिस भी मौके पर जा पहुंची, जिसके बाद उक्त मकान को घेर लिया गया। बाद में पुलिस व जेल कर्मियों ने मकान में घुसकर आरोपी बंदी आदित्य त्यागी को पकड़ लिया। बंदी के पकड़े जाने के बाद उसे कड़ी सुरक्षा में जेल भेज दिया गया।
हेड वार्डन ने दर्ज कराई बंदी के खिलाफ एफआईआर
मुजफ्फरनगर। जिला अस्पताल में मेडिकल के बाद जेल ले जाने के दौरान बंदी आदित्य त्यागी के भागने के प्रयास के मामले में हेड वार्डन उल्फत सिंह ने शहर कोतवाली में आरोपी बंदी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
बंदी आदित्य त्यागी की आंख में कुछ परेशानी थी। उसे और दूसरे बंदी वाजिद को डॉक्टरी जांच के लिए जेल कर्मी जिला अस्पताल में ले गए थे। वापसी में आदित्य त्यागी हथकड़ी निकाल कर फरार हो गया, जिसे कुछ देर बाद ही पब्लिक की मदद से पकड़ लिया गया। उसके खिलाफ हेड वार्डन ने शहर कोतवाली में हिरासत से फरार होने का मुकदमा दर्ज कराया है। आदित्य उसका पिता प्रमोद और एक भाई हत्या के मामले में वर्ष 2014 से जिला कारागार में बंद हैं - एके सक्सेना, जेल अधीक्षक।