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आसाराम के आश्रम में बना था अखिल की हत्या का प्लान

Sat, 26 Sep 2015 12:24 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
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मुजफ्फरनगर। जोधपुर की जेल में बंद आसाराम बापू के रसोइये अखिल गुप्ता की हत्या फुलप्रूफ प्लान के तहत दिल्ली के शूटरों ने अंजाम दी थी। बंगलूरू में अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़े वासु और ज्योति से अहम सुराग हाथ लगे हैं। बापू के साधक ही गवाहों को रास्ते से हटाने के लिए हत्यारे बन गए।
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शहर में एक हफ्ते तक रेकी करने के बाद अखिल की हत्या कर दी गई। पुलिस पूरे मामले की कड़ियां जोड़ चुकी है, बस शूटरों का हाथ आना बाकी है।

बंगलूरू में तीन दिन पहले अहमदाबाद की क्राइम ब्रांच ने बापू की साधक दमन द्वीप निवासी सेजल उर्फ ज्योति प्रजापति और बीजापुर कर्नाटक के वासव राज अवन्ना तल्लोई उर्फ वासु को गिरफ्तार किया था। दो दिन की रिमांड में क्राइम ब्रांच ने दोनों से सिलसिलेवार पूछताछ की।

बापू के रसोइये अखिल गुप्ता की कोतवाली नई मंडी इलाके में जानसठ रोड पर 11 जनवरी को हुई हत्या का राजफाश हो गया है। आसाराम के दो चेलों ने ही गीता एंकलेव निवासी नरेश गुप्ता के इकलौते पुत्र अखिल को मौत के घाट उतारा था।
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सूरत की बहनों से दुष्कर्म के आरोप और शाहजहांपुर की किशोरी के यौन शोषण मामले में फंसे आसाराम और नारायण साईं के गवाहों को रास्ते से हटाने के लिए फुलप्रूफ प्लान बनाया गया था। गुजरात पुलिस की पूछताछ में कई अहम खुलासे हुए हैं।

सूरत में बापू के आश्रम का जिम्मा वासु और ज्योति पर था। यहीं पर दस साधकों ने बापू को बचाने की कसमें खाईं। ज्योति ने ब्रेनवॉश किया कि आसाराम को झूठा फंसाया गया है। ऐसे में कई साधक गवाहों को रास्ते से हटाने की योजना का हिस्सा बन गए।

राजकोट के वैद्य अमृत प्रजापति और मुजफ्फरनगर के अखिल गुप्ता का टारगेट दिल्ली के संजय उर्फ अंकित और इलाहाबाद के कार्तिक को सौंपा गया। दिल्ली के पटपड़गंज में दोनों ने हथियार और बाइक का इंतजाम किया। 23 मई 2014 को राजकोट क्लिनिक पर बाइक पर आए दो बदमाशों ने आसाराम के आश्रम में लंबे समय चिकित्सक रहे अमृत प्रजापति को गोली मार दी, जिनकी 11 जून को अहमदाबाद के हॉस्पिटल में मौत हो गई। अखिल हत्यारों का दूसरा निशाना बना।

अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के विवेचक सीबी चौधरी के मुताबिक आरोपी संजय और कार्तिक आसाराम के आश्रम में कई बार पहले भी अखिल से मिल चुके थे। वह उसे अच्छी तरह जानते-पहचानते थे। हत्या से पहले मुजफ्फरनगर में ठहरे बापू के इन चेलों ने अखिल की दिनचर्या की रेकी की।

मौका पाकर अखिल की हत्या कर बाइक से फरार हो गए। अखिल को मौत के घाट उतारने के बाद उन्होंने वासु से संपर्क किया और पैसों की डिमांड की। जांच में यह भी सामने आया है कि जोधपुर में राहुल सचान, पानीपत में महेंद्र चावला पर हमले भी इसी योजना का हिस्सा हैं।

पूरे मामले को लीड सूरत आश्रम का प्रवीण कर रहा था। वारदात की कड़ियों को पुलिस जोड़ चुकी है। अखिल गुप्ता के हत्यारे संजय और कार्तिक की तलाश में पुलिस जुटी है। उनके घरों और दूसरे ठिकानों पर दबिश दी गई है, लेकिन फिलहाल वह कानून की पकड़ से दूर हैं।

शूटरों के पकड़े जाने के बाद ही अखिल गुप्ता हत्याकांड की परतें पूरी खुल पाएंगी। मसलन, एक हफ्ते वह कहां रुके। किस-किसी मदद ली। अखिल के घर आने और जाने के टाइम का कैसे पता किया गया। तमाम सवालों के जवाब दोनों के पकड़ में आने के बाद ही सामने आएंगे।

वासु और ज्योति पर गवाहों की हत्या का षड्यंत्र रचने का मुकदमा दर्ज हो चुका है। गुजरात पुलिस इस सवाल का जवाब भी खोजने में जुटी है कि क्या गवाहों की हत्या के गेम में जेल में बंद आसाराम और नारायण साईं की ओर से इशारा हुआ था या फिर चेलों ने ही पूरा षड्यंत्र रचा।
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