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श्मशान घाट में पेड़ पर लटका मिला एचसीपी का शव 

Fri, 03 Mar 2017 12:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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मृतक सिपाही का फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
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मुजफ्फरनगर की एसडीएम कोर्ट में तैनात एक एचसीपी का शव बृहस्पतिवार सुबह खरखौदा के काजीपुर गांव के श्मशान घाट में पेड़ से लटका मिलने से सनसनी फैल गई। परिजनों का आरोप है कि एचसीपी ने एसडीएम की प्रताड़ना से परेशान होकर आत्महत्या की है। पुलिस का कहना है कि मौके से मिले सुसाइड नोट में एसडीएम सदर मुजफ्फरनगर पर जबरन फंसाने और उत्पीड़न करने का आरोप है। घटना के बाद मुजफ्फरनगर के अफसरों में इस मामले को लेकर हड़कंप मचा रहा। मुजफफरनगर के एसएसपी बबलू कुमार ने एसडीएम को अपने कार्यालय में बुलवाकर पूरे मामले की जानकारी ली।
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पुलिस के अनुसार हापुड़ के सिंभावली थाना क्षेत्र के गांव मुक्तेश्वरा निवासी बिजेंद्र सिंह (59) पुत्र दाताराम यूपी पुलिस में एचसीपी के पद पर तैनात था। 15 दिन पहले ही उसका खतौली से मुजफ्फरनगर ट्रांसफर हुआ था। वर्तमान में वह मुजफ्फरनगर में एसडीएम सदर कोर्ट और सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट का काम देख रहा था। एचसपी बिजेंद्र सिंह का परिवार मेडिकल थाना क्षेत्र के अशोक विहार में रह रहा है। बिजेंद्र रोजाना मेरठ से ही मुजफ्फरनगर आता जाता था।

परिजनों ने पुलिस को बताया कि बुधवार शाम करीब सात बजे बिजेंद्र घर पहुंचा था। वर्दी बदलकर वह मोबाइल फोन और पैन लेकर जाने लगा। परिजनों ने उसे खाना खाने के लिए कहा तो उसने कुछ समय बाद लौटने की बात कही। परिजनों ने रात करीब दस बजे बिजेंद्र के मोबाइल फोन पर कॉल की, लेकिन रिसीव नहीं हुई। जिसके बाद परिजन बिजेंद्र की तलाश कराने के लिए मेडिकल थाने पहुंचे, लेकिन मेडिकल पुलिस ने तहरीर और फोटो लेकर बृहस्पतिवार को आने के लिए कहा।
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बृहस्पतिवार सुबह खरखौदा थाना क्षेत्र स्थित गांव काजीपुर के एक ग्रामीण ने श्मशान घाट में पेड़ पर एक शव लटका देखा। सूचना पर एचसीपी के परिजन भी मौके पर पहुंच गए और शव की शिनाख्त बिजेंद्र के रूप में की। बृहस्पतिवार देर शाम पोस्टमार्टम के बाद बिजेंद्र का शव घर पहुंचा तो परिवार के लोगों में कोहराम मच गया। बिजेंद्र के परिवार में पत्नी किरण देवी, दो बेटे अरविंद और हिमांशु है। अरविंद मेरठ में ही ठेकेदारी करता है जबकि हिमांशु एनएएस डिग्री कालेज में बीए द्वितीय वर्ष का छात्र है। परिवार के सदस्यों को रो-रोकर बुरा हाल था।

कॉपी में लिखकर छोड़ा सुसाइड नोट
इंस्पेक्टर खरखौदा मनीष सक्सेना ने बताया कि बिजेंद्र ने मरने से पहले शव के पास में ही रखी एक कापी में सुसाइड नोट लिखा था। जिसमें उसने एसडीएम सदर मुजफ्फरनगर राम अवतार गुप्ता पर जबरन उसे फंसाने का आरोप लगाया है। इसी कारण आत्महत्या करना भी लिखा है। पुलिस ने शव तथा मौके से मिले सुसाइट नोट, जेब में रखा मोबाइल फोन, पैन व रस्सी कब्जे में ले ली। 

सुसाइड नोट का मजमून
इंस्पेक्टर खरखौदा के अनुसार सुसाइड नोट में लिखा है कि  ‘आज एसडीएम सदर मुजफ्फरनगर रामअवतार गुप्ता ने नौशाद जो थाना पुरकाजी से बंद था, उसकी फाइल गायब करा दी। 28 फरवरी 2017 को उसकी जमानत आई, तो उन्होंने कहा कि यह बहुत शातिर है, इसको नहीं छोड़ना है। फाइलें दफ्तर में रखी रहती हैं। कल एक जमानती आया था, तो उन्होंने कहा कि दूसरा भी देखूंगा। जब दूसरा आया तो कहा कि फाइल लाओ। फाइल मेरी मेज पर नहीं मिली, क्योंकि उसे जमानत नहीं देनी थी। मुझे फंसाने के लिए मुझ पर आरोप लगाया जा रहा था, इसलिए मैं सुसाइड कर रहा हूं’।


मैने शोषण नहीं किया : एसडीएम     
मुजफ्फरनगर। एसडीएम सदर राम अवतार गुप्ता का कहना है कि पुरकाजी के एक मुलजिम की रिहाई होनी थी, जिसकी फाइल गुम हो गई थी। इस फाइल को लेकर वकीलों ने हंगामा किया था। बाद में डुप्लीकेट कागजों के आधार पर मुलजिम को रिहा किया गया। कोर्ट मोहर्रिर को वकीलों के सामने बुलाया भी नहीं गया।    
 
एसडीएम का कहना है कि मैंने कोर्ट मोहर्रिर बिजेंद्र को ऐसी कोई बात नहीं कही, जिससे उसे ठेस पहुंचे। फाइल गुम होने पर जब वकीलों ने हंगामा किया तो मामला दबाने के लिए डुप्लीकेट कागजों के आधार पर ही मुजरिम की रिहाई कर दी गई। इससे पहले वकीलों ने उसे कोई बात कही हो तो इसका मुझे नहीं पता। मैने केवल यह कहा था कि सिटी मजिस्ट्रेट ने यहां फाइल ढुंढवा लो। गुप्ता का यह भी कहना है कि इस मामले के बाद भी बिजेंद्र ने तीन मुजरिमों की जमानत उनके न्यायालय से कराई। मेरे ऊपर लगाए गए आरोप गलत हैं। मैने किसी प्रकार का कोई शोषण कोर्ट मोहर्रिर का नहीं किया।  
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