कोर्ट मोहर्रिर बिजेंद्र सिंह की आत्महत्या के मामले में जांच शुरू हो चुकी है। एचसीपी का सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय में रखा सामान भी जांच का हिस्सा बनेगा। आत्महत्या की घटना के बाद कोर्ट मोहर्रिर के पद पर अभी तक कोई नई नियुक्ति नहीं हुई है। इस कारण न्यायिक कार्य भी बाधित हो रहा है।
एसडीएम सदर रामअवतार गुप्ता पर कोर्ट मोहर्रिर बिजेंद्र सिंह को प्रताड़ित कर आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का आरोप है। उन पर मेरठ के खरखौंदा थाने में मुकदमा भी दर्ज हुआ है। मेरठ में मुकदमा दर्ज होने के बाद डीएम डीके सिंह ने भी इस मामले में मजिस्ट्रीयल जांच बैठा दी है। एडीएम प्रशासन मनोज कुमार ने जांच शुरू कर दी है। एचसीपी बिजेंद्र सिंह एसडीएम की फाइल गुम होने के मामले में मिली धमकी के बाद वह होश हवास खो बैठा था।
वह अपना सारा सामान सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट में ही छोड़कर चला गया। उसकी सारी फाइलें और उसका अपना निजी बैग अभी तक ज्यों के त्यों रखे हैं। एचसीपी का सब सामान अब जांच का हिस्सा बनेगा। इस सामान में कोई ऐसा सबूत तो नहीं है, जो केस के लिए अहम हो। जांच अधिकारी संबंधित लोगों को पत्र जारी कर चुके हैं। 14 मार्च तक सबके बयान दर्ज कराने की तैयारी है। आत्महत्या प्रकरण के बाद सिटी मजिस्ट्रेट और एसडीएम न्यायालय में नए कोर्ट मोहर्रिर की तैनाती नहीं हुई है। इस कारण न्यायालय का कार्य भी किसी हद तक प्रभावित हो रहा है।