बरला के चर्चित दोहरे हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने पिता-पुत्र को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। करीब साढ़े छह साल पहले मामूली बात को लेकर हुई कहासुनी में दादा-पोते की धारदार हथियारों से काटकर हत्या कर दी गई थी।
छपार थाना क्षेत्र के गांव बरला के जंगल में नौ नवंबर 2011 को दोहरा हत्याकांड हुआ था। छपार थाने पर बरला निवासी मोहम्मद आलिम ने मुकदमा दर्ज कराया था। उसने बताया था कि वह अपने पिता रियासत और पुत्रों आजाद उर्फ राजा, मुनव्वर उर्फ मोनू और साले के लड़के फजरुद्दीन के साथ अपने खेत पर पापुलर के पत्ते एकत्र कर रहा था। गांव के ही बारिक पुत्र अब्दुल हसन अपने पुत्र शहबाद, शाहनवाज उर्फ काला व शाहनजर उर्फ मोनू के साथ आया।
आरोपियों ने पापुलर के पेड़ों को अपना बताते हुए धारदार हथियारों से हमला कर उसके पिता रियासत (60) और पुत्र आजाद उर्फ राजा (24) की हत्या कर दी। मोनू और फजरूद्दीन को घायल कर दिया। इस मुकदमे की सुनवाई जिला जज डॉ गोकुलेश की अदालत में हुई। जिला शासकीय अधिवक्ता दुष्यंत त्यागी, एडीजीसी योगेश कुमार शर्मा ने कोर्ट में नौ गवाह और सबूत पेश किए।
मंगलवार को जिला जज ने अभियुक्त बारिक और उसके पुत्र शहबाद को हत्या व हत्या का प्रयास करने का दोषी करार देते हुए धारा 302 के तहत दोनों को मृत्युदंड और 10-10 हजार रुपये जुर्माना, धारा 307 के तहत दोनों को 10-10 वर्ष का कारावास और 10-10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। बाकी दो अभियुक्त शाहनवाज उर्फ काला और शाहनजर उर्फ मोनू के नाबालिग होने पर उनका वाद किशोर न्यायालय के सुपुर्द हो गया था।
वारदात के बाद से ही जेल में हैं पिता-पुत्र
मुजफ्फरनगर। बरला के दोहरे हत्याकांड में मृत्युदंड की सजा पाने वाले पिता-पुत्र बारिक और शहबाद बीते साढ़े छह साल से जेल में बंद हैं। वारदात के बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। यहां और हाईकोर्ट से जमानत अर्जी निरस्त होने पर तभी से दोनों में जेल में बंद हैं। इस मुकदमे में वादी पक्ष की ओर से पैरवी उनके अधिवक्ता दुष्यंत त्यागी ने की है।
कोर्ट ने विरलतम केस माना
मुजफ्फरनगर। बरला के दोहरे हत्याकांड में दादा और पोते की धारदार हथियारों से काट कर नृशंस हत्या किए जाने को जिला जज की कोर्ट ने विरलतम मानते हुए दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है।